
अब किसानों को मिलेगा 40 किलो की यूरिया का कट्टा Publish Date : 31/07/2026
अब किसानों को मिलेगा 40 किलो की यूरिया का कट्टा
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अब किसानों को 40 किलो की यूरिया का कट्टा मिलेगा! क्या इससे किसानों को राहत मिलेगी या खर्च और बढ़ेगा?
किसान भाइयों, एक बार फिर उर्वरक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खबर है कि अब तक मिलने वाला 45 किलो का यूरिया बैग घटाकर 40 किलो कर दिया जाएगा। यानी अब किसानों को 45 किलो की जगह 40 किलो यूरिया का कट्टा मिलेगा। इस खबर के सामने आते ही किसानों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कोई इसे सरकार का बेहतर कदम बता रहा है तो कोई इसे किसानों पर बढ़ती महंगाई का नया बोझ मान रहा है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसान को पहले जितनी ही खेती के लिए अब ज्यादा कट्टे खरीदने पड़ेंगे? क्या इससे खेती की लागत बढ़ेगी? और आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया? इन सभी सवालों को समझना जरूरी है।

खबरों के अनुसार, केंद्र सरकार ने यूरिया के बैग का वजन 45 किलो से घटाकर 40 किलो करने का फैसला किया है। नए बैग में 37 प्रतिशत नाइट्रोजन के साथ 17 प्रतिशत सल्फर भी शामिल होगा। यानी यह केवल वजन में बदलाव नहीं है, बल्कि उत्पाद के स्वरूप में भी परिवर्तन किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि सल्फर युक्त यूरिया फसलों को अतिरिक्त पोषण देगा और अलग से सल्फर की जरूरत कम हो सकती है।
सरकार का एक और दावा है कि इससे यूरिया के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। लंबे समय से यह चिंता जताई जाती रही है कि किसान आवश्यकता से अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा कुछ जगहों पर यूरिया का उपयोग कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी होने की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि यह कदम यूरिया के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देगा।
लेकिन किसानों की चिंता भी पूरी तरह वाजिब है। किसान पूछ रहे हैं कि यदि बैग का वजन कम होगा तो क्या एक एकड़ में पहले जितनी मात्रा के लिए अब अधिक बैग खरीदने पड़ेंगे? यदि कीमत में उसी अनुपात में कमी नहीं हुई या बार-बार खरीदारी करनी पड़ी, तो खेती की लागत पर असर पड़ सकता है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 40 किलो वाले नए बैग की कीमत भी कम रखी गई है, लेकिन किसान इस बात पर नजर रखेंगे कि वास्तविक खर्च कितना पड़ता है और खेत में इसका परिणाम कैसा रहता है। यदि सल्फर की वजह से फसल को अतिरिक्त लाभ मिलता है, तो यह बदलाव उपयोगी भी साबित हो सकता है। वहीं यदि किसानों को अलग से अन्य उर्वरक भी खरीदने पड़ें, तो लागत बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी उर्वरक का उपयोग केवल मात्रा देखकर नहीं, बल्कि मिट्टी परीक्षण और फसल की आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए। यूरिया का अधिक उपयोग न केवल पैसे की बर्बादी है, बल्कि इससे फसल गिरने, कीट-रोग बढ़ने और मिट्टी की सेहत खराब होने का खतरा भी रहता है।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बदलाव का वास्तविक असर तभी पता चलेगा जब नया यूरिया बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचेगा और उसके परिणाम सामने आएंगे। इसलिए फिलहाल अफवाहों से बचें और आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करें।
