पीलीभीत में बनेगा पहला बासमती व जैविक प्रशिक्षण केंद्र      Publish Date : 23/05/2026

पीलीभीत में बनेगा पहला बासमती व जैविक प्रशिक्षण केंद्र

विज्ञानी करेंगे बासमती चावल से जुड़े शोध, किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा-

तराई क्षेत्र के पीलीभीत जिले में 15 करोड़ रुपये की लागत से देश के पहले बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र एवं प्रदर्शन फार्म का निर्माण होने जा रहा है। सेंटर पर कृषि विज्ञानी बासमती की जैविक खेती से जुड़े शोध करेंगे। डेमो फार्म में बासमती की उन्नत प्रजातियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। यह सेंटर मेरठ के - मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन (बीईडीएफ) और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) कीदेखरेख में काम करेगा। 28 अप्रैल को इसकी घोषणा होगी। उत्तराखंड के बासमती किसानों को भी सेंटर का लाभ मिलेगा।

                               

यह ड्रीम प्रोजेक्ट केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री एवं पीलीभीत से सांसद जितिन प्रसाद का है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पीलीभीत में खटीमा मार्ग पर गांव टांडा बिजेरी के पास पांच एकड़ जमीन दी है। 28 अप्रैल को यह जमीन केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को सौंपी जाएगी। केंद्रीय वाणिज्य. राज्यमंत्री जितिन प्रसाद भी जमीन का निरीक्षण करेंगे। मोदीपुरम स्थित बासमती विकास फाउंडेशन के संयुक्त निदेशक डा. रितेश शर्मा की देखरेख में इस सेंटर में गतिविधियां चलेंगी। अभी तक पूरे देश में मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन में ही बासमती पर शोध होता है। किसानों को ट्रेनिंग दी जाती है और बीज वितरण भी होता है। खास बात यह है कि पीलीभीत सेंटर में बासमती चावल से जुड़े शोध होंगे।

देश में 24 लाख हेक्टेयर में होता है उत्पादन

देश में करीब 24 लाख हेक्टेयर में करीब एक करोड़ टन बासमती का उत्पादन होता है। इसमें 60 लाख टन चावल निर्यात होता है। शेष चावल की देश में खपत होती है। बासमती की 45 प्रजातियां चलन में हैं। हरियाणा में सर्वाधिक 40 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 22 प्रतिशत बासमती चावल का उत्पादन होता है। अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा, मेरठ समेत उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में बासमती का उत्पादन होता है।