जिस किसान के पास जितनी जमीन, उसे उतनी ही खाद मिलेगी      Publish Date : 14/04/2026

जिस किसान के पास जितनी जमीन, उसे उतनी ही खाद मिलेगी

खाड़ी देशो जारी तनाव और कच्चे माल की अन्तर्राष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बीच उर्वरक संकट की आशंका को देखते हुए सरकार यूरिया के दुरूपयोग एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उर्वरक वितरण की एक नई व्यवस्था को लागू करने जा रही है।

इस नई उर्वरक वितरण व्यवस्था के तहत अब किसान को उसकी जमीन के हिसाब से ही यूरिया मिलेगा। कहने का अर्थ यह है कि जिस किसान के पास जितनी जमीन होगी, अब उसे उतनी ही खाद मिल सकेगी।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से आवश्यकता से अधिक खरीद और अवैध डायवर्जन पर प्रभावी रोक लग सकेगी। इसके लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम सात बोरी यूरिया देने का मानक निर्धारित किया गया है।

                                

किसानों को अतिरिक्त बोझ से बचाने और खाद की कीमत को नियंत्रित रखने के लिए हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने 41 हजार करोड़ रूपये की अतिरिक्त सब्सिडी स्वीकृत की है। नई व्यवस्था के तहत खाद खरीदते समय किसानों को ई-प्वाइंट ऑफ सेल मशीन पर अपनी फार्मर आईडी को दर्ज कराना अनिवार्य है। इस प्रकार से सिस्टम तुरंत यह जानकारी देगा कि सम्बन्धित किसान के पास कितनी जमीन है और वह अभी तक कितनी खाद खरीद चुका है।

इसी सूचना के आधार पर किसान को आगे खाद मिल सकेगी। खाद की प्रत्येक बोरी का ट्रैक रिकार्ड यह भी रखा जाएगा, जिससे यह ज्ञात हो सकेगा कि खाद की कौन सी बोरी किस किसान को दी गई है। प्रत्येक राज्य अपनी मिट्टी की प्रकृति और फसल पैटर्न के अनुसार उर्वरक की अधिकतम सीमा निर्धारित कर सकेगी।

कुछ विशेष तथ्यः

  • फार्मर आईडी को जमीन के रिकार्ड, आधार और बैंक खाते से जोड़ा जा रहा है।
  • अभी तक देश में 9 करोड़, 29 लाख से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।
  • बाकी बचे किसानों के पंजीकरण का काम भी चल रहा है। उर्वरकों पर देश में प्रतिवर्ष भारी सब्सिडी दी जाती है।
  • वर्तमान में 45 किलोग्राम की यूरिया की एक बोरी किसानों को 266 रूपये में प्राप्त होती है।
  • इसके विपरीत यूरिया की प्रति बोरी लागत लगभग 2200 रूपये तक की होती है। इसी अंतर का लाभ उठाकर किया जाता है अवैध डायवर्जन।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में एक जून से लागू करने की तैयारी की जा रही है, जहाँ प्रति हेक्टेयर सात बोरी यूरिया का मानक निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि सस्ती कृषि यूरिया का औद्योगिक डायवर्जन रूक सकेगा। फार्मर आईडी के माध्यम से किसान की जमीन, फसल और परिवार आदि का डेटा एकीकृत रूप से जुड़ा होगा, जिससे यह तय किया जा सकेगा कि किस किसान को कितनी खाद की वास्तव में आवश्यकता है। इस प्रणाली का सीधा लाभ किसानों को बेहतर उर्वरक की उपलब्धता के रूप में मिलेगा।