तोरई की नई किस्म का विकास      Publish Date : 31/01/2026

                तोरई की नई किस्म का विकास

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वारणसी के कृषि वैज्ञानिकों ने तोरई की एक ऐसी किस्म विकसित की है, जिसके अन्दर से बासमती की महक आती है। यह सफलता वैज्ञानिकों को आठ वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद मिली है।

तोरई में बासमती के जैसी खुशबु

नव विकसित तोरई की खेती जिस स्थान पर भी की जाएगी, वहाँ इसकी मनमोहक महक लोगों के मन को मोह लेगी। इसके साथ ही जब आप इस तोरई कों अपने किचन में पकाएंगे, तो बासमती की महक से आपका पूरा घर भी महक उठेगा।

अब तक की सबसे अनोखी किस्म

                                                          

तोरई की इस प्रजाति का रंग हल्का हरा है। बिहार एवं उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में हल्के हरे रंग की तोरई को काफी पसंद किया जाता है। इनमें यूपी के बस्ती और गोरखपुर मंडल सेद सटे हुए इलाके शामिल हैं। आईसीवीआर वाराणसी के निदेशक डॉ0 राजेश कुमार ने बताया कि तोरई की यह किस्म अपने आप में काफी अनोखी किस्म है।

आईसीवीआर के कृषि वैज्ञानिकों की एक बड़ी सफलता

तोरई की इस किस्म को विकसित करने वाले आईसीवीआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ0 त्रिभुवन चौबे ने हमारी टीम को बताया कि बासमती के जैसी महक वाली तोरई की इस नई प्रजाति को नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, नई दिल्ली में पंजीकृत भी किया गया है। इस किस्म को वैज्ञानिकों ने बीआरएसजी 7-17 नाम दिया है।

किसानों को मिलेगा बीज

संस्थान अब इस किस्म के बीज तैयार कर किसानों के लिए नई वैराइटी के रूप में जारी करने की तैयारी कर रहा है। डॉत्र त्रिभुवन चौबे ने जानकारी प्रदान की कि बासमती के जैसी खुशबु वाली तोरई की इस प्रजाति को किसान जल्द ही उगा सकेंगे। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान जल्द ही इसके सीड्स खेती के लिए किसानों उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं।

50 से 55 दिन में आएगी फसल

                                                 

कई किसानों ने तोरई की इस किस्म बीज के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों से सम्पर्क भी किया है। बासमती के जैसी महक वाली इस तोरई को पकाने या उबालने के दौरान भी ऐसी ही महक बनी रहती है।

तोरई की यह किस्म हल्के हरे रंग का फल देती है। इसके फल की औसत लम्बाई 27.46 से.मी., फल का डायमीटर 3.35 सेंटीमीटर और वजन लगभग 156.5 ग्राम होता है। इस किस्म पर 52 से 60 दिन के अन्दर फलआने लगते हैं। इस किस्म के प्रत्येक पौधे का औसत उत्पादन 1.13 किलोग्राम तक होता है।

लोग करेंगे पसन्द

तोरई की यह प्राकृतिक प्रजाति अपने आप में अनूठी है। जानकारों का मानना है कि इस नई किस्म से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होगा, क्योंकि बासमती के जैसी महक वाली इस तोरई को लोग पसन्द भी करेंगे।