
चीनी मिलों को जनवरी के महीने में गन्ने की किल्लत होने की आशंका Publish Date : 24/12/2025
चीनी मिलों को जनवरी के महीने में गन्ने की किल्लत होने की आशंका
जनवरी के महीने में क्षेत्र की चीनी मिलों को गन्ने की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसका कारण यह है कि अब क्षेत्र में गन्ने की पेड़ी फसल लगभग समाप्त होने के कगार पर है, जबकि गन्ने की पौधा फसल यानि बावक फसल की कटाई फरवरी के महीने में शुरू की जाएगी।
इस सम्बन्ध में कृषि विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि गन्ने की समय पूर्व करने से नए पौधों का जमाव प्रभावित होगा, जिसके चलते अगले वर्ष की पेड़ी फसल के कमजोर होने की आशंका रहती है। क्षेत्र के गन्ना किसान गन्ने की बुवाई करने के बाद प्रत्येक खेत से दो वर्ष में दो पैदावार प्राप्त करते हैं। पहले वर्ष की फसल को पौधा या बावक फसल तो दूसरे वर्ष की उपज को पेड़ी फसल के रूप में जाना जाता है।

चीनी मिलों के संचालन के दौरान किसान पहले पेड़ी फसल की कटाई करते हैं और पौधा फसल की कटाई फरवरी के महीने में शुरू करते हैं।
अनुभवी गन्ना किसान बताते हैं कि इस समय क्षेत्र में लगभग 80-90 प्रतिशत पेड़ी के गन्ने की कटाई हो चुकी है और अगले 10-15 दिनों में यह पूरी तरह से समाप्त हो जाने की उम्मीद है और इसके बाद चीनी मिलों में गन्ने की आमद प्रभावित होगी।
“इस बार गन्ने की उपज कम हो रही है। इससे जनवरी के महीने में चीनी मिलों के लिए गन्ने की सप्लाई कम होने की सम्भावना है।
ऐसे में क्रेन को प्रतिदिन 10-12 घंटे तक के लिए रोक कर काम चलाना पड़ेगा और इससे चीनी मिल को नुकसान होना तय माना जा रहा है।“
---महाप्रबन्धक गन्ना।
इसके अलावा, चीनी मिलों की पेराई शुरू होने के बाद गन्ना 400-450 रूपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जिसके चलते किसान कोल्हू और चरखी आदि को भी गन्ना बेच चुके हैं। यह भी आगामी गन्ने की कमी होने का एक प्रमुख कारण बन सकता है। किसान और उद्योग दोनों के लिए ही पेड़ी फसल की कटाई और उत्पादन में यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि आने वाले महीनों में मिलों की संचालन क्षमता और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
