
झारखण्ड़ के किसानों के लिए बकरी पालन करने के लिए अनुकूल समय Publish Date : 12/10/2026
झारखण्ड़ के किसानों के लिए बकरी पालन करने के लिए अनुकूल समय
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 पूतन सिंह
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बकरी पालन से कमाई का मौका! 100 बकरी और 5 बकरों की यूनिट की स्थापना करने पर मिलेगी लाखों की सब्सिडी।
आज के समय में किसान बहन और भाई खेती करने के साथ ऐसे बिजनेस की और तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे कम लागत में अधिक कमाई की संभावनाएं है। इन्हीं बिजनेस में से एक है बकरी पालन का काम जो कि वर्तमान में किसानों को बीच तेजी लोकप्रिय हो रहा है। इसके साथ ही इस करोबार की शुरुआत करने पर सरकार किसानों और पशुपालकों को 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रही हैं।
भारत में पुरातन काल से लेकर आज तक के समय में पशुपालन किसानों के लिए उनकी आमदनी की रीढ़ बन हुआ है। ऐसे में कई राज्यों के किसान बकरी पालन की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं और बड़ा मुनाफा भी कमा रहे हैं। इसी दौरान झारखंड में ग्रामीण किसानों और पशुपालकों के लिए बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में विकसित करने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत वित्ताीय वर्ष 2026-27 में व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन इकाई स्थापित करने के लिए सरकार 70 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध करा रही है।

कितने बकरी और बकरों के यूनिट पर मिलेगा अनुदान?

अगर आप झारखंड के किसान है और इस सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत इस बार छोटे स्तर पर बकरी पालन करने के बजाय व्यावसायिक इकाई स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 100 बकरी और 5 बकरों की यूनिट बनाई जाएगी अथार्त इस इकाई में ब्लैक बंगाल नस्ल के बकरा-बकरियों को शामिल करने का प्रावधान रखा गया है, जिसके तहत सरकारी सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएंगी।
9.78 लाख रुपये आती है एक यूनिट की कुल लागत
योजना के तहत एक व्यावसायिक बकरी पालन इकाई की कुल लागत 9.78 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें सरकार की ओर से पात्र लाभार्थियों को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसका विवरण कुछ इस प्रकार से है-
- इकाई की कुल लागतः 9.78 लाख रुपये।
- सरकारी अनुदानः लगभग 6.84 लाख रुपये।
- अनुदान की दरः 70 प्रतिशत।
- लाभार्थी का न्यूनतम अंशदानः कुल लागत का 15 प्रतिशत।
- यूनिट का आकारः 100 बकरी और 5 बकरे।
इस हिसाब से पात्र लाभार्थी को सरकार की ओर से लगभग 6.84 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल सकती है। शेष राशि की व्यवस्था लाभर्थी को निर्धारित नियमों के अनुसार स्वयं या बैंक ऋण के माध्यम से करनी होगी।
कितनी किस्तों में मिलेगा अनुदान?
योजना के अंतर्गत अनुदान राशि का भुगतान एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किया जाएगा। इससे योजना के निर्धारित कार्यों को पूरा करने और उनकी प्रगति के आधार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पहली किस्त के रूप में स्वी योजना की अनुदान राशि का 40 प्रतिशत दिया जाएगा। इसके बाद दूसरी किस्त में शेष 60 प्रतिशत राशि का भुगतान शेड का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद किया जाएगा।
योजना का लाभ लेने के लिए क्या हैं पात्रता नियम?
व्यावसायिक बकरी पालन इकाई स्थापित करने के लिए आवेदकों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी, जो कुछ इस तरह से हैं-
- आवेदक झारखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- बकरी फार्म स्थापित करने के लिए कम से कम 50 डिसमिल भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
- आवेदक को बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना चाहिए।
- लाभार्थी को निर्धारित वित्तीय अंशदान की व्यवस्था स्वयं ही करनी होगी।
- योजना के तहत निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
कहां करें आवेदन?
अगर आप झारखंड में रहते हैं और व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने जिले के पशुपालन विभाग या संबंधित पशुपालन पदाधिकारी से संपर्क करें। वहां से आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों, आवेदन की समय सीमा और लाभार्थी के चयन के नियमों की जानकारी प्राप्त करें। साथ ही आवेदन के लिए निवास प्रमाण पत्र, पहचान संबंधी दस्तावेज, भूमि से जुड़े कागजात, बैंक खाते का विवरण और बकरी पालन के अनुभव से संबंधित पमाण पत्र इन सभी दस्तावेजों को तैयार कर रखें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।