गेहूं की प्रगतिशील खेती किस्में      Publish Date : 08/11/2026

          गेहूं की प्रगतिशील खेती किस्में

                                                                                          प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गेहूं की प्रमुख किस्में: रबी सीजन में गेहूं की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सही समय पर सही किसानों का चुनाव करना जरूरी है। गैजेट की पांच उन्नत किस्में DBW 303, Wh 1270, DBW 327, HD 3226 और DBW 187 अपनी अलग-अलग उपज क्षमता के कारण किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। इनमें से कुछ में रोग एवं कीटों से लड़ने की क्षमता और बेहतर दाना गुणवत्ता जैसी विशेषताएं हैं।

धान की कटाई के बाद कई राज्यों में गेंहू की तैयारी की जा रही है। बीज से पहले किसानों को अपनी जमीन, सींच की सुविधा और रोपण के समय पर ध्यान देना चाहिए। केवल अधिक निर्माण के दावे को देखने के लिए किसी भी किस्म का चयन करना सही नहीं है।

गेहूं की  प्रमुख किस्मों की विशेषताएं एक नजर में

DBW 303 को वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है। इसे भारतीय प्रयोगशाला एवं अनुसंधान संस्थान, करनाल ने विकसित किया है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्र में अगेती किस्मों के लिए उपयुक्त बताया गया है।

इस किस्म की उपज करीब 81.2 प्रति एकड़ बताई गई है। ऑप्टिमाइज़्ड रेनॉल्ट में इसका प्रोटोटाइप लगभग 39 मिलियन प्रति बैरल तक हो सकता है। इसके दानों में करीब 12.1 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है।

इस मसाले के आवेदन से भी अच्छी क्षमता बताई गई है। यह पीली और भूरी रतुआ के प्रति प्रतिरोधी क्षमता भी होती है। उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्र में अगेती प्रजातियों की बुवाई करने वाले किसान इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 WH 1270 किस प्रकार की किस्म है?

WH 1270 किस्म को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है। यह गेंहू की अगेती किस्म और कम अवधि में परिपक्व होने के लिए जानी जाती है। इसके दाने मोती तरह होते हैं।

उपयुक्त सीज़न और फ़सल की देखभाल बैठक में WH 1270 से करीब 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड तक उत्पादन मिल सकता है। हालाँकि, किसान इस प्रजाति के बीज के निशान से पहले अपने क्षेत्र में इसकी उपयुक्तता की जांच अवश्य कर लें।

इसकी प्रामाणिकता अवधि की जानकारी स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से भी ली जानी आवश्यक है, क्योंकि हर क्षेत्र में एक जैसी उपज का प्रदर्शन नहीं हो पा रहा है।

DBW 327 अर्थात करण शिवानी

                         

DBW 327 को करण शिवानी के नाम से जाना जाता है। इसका प्रमुख गुण इसकी मजबूती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज हवा और बारिश के बीच मानक के आधार पर जमीन पर गिरावट की समस्या हो सकती है। मजबूत तने वाली इस किस्म में खराब होने का जोखिम कम हो सकता है। यह उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र और मध्य क्षेत्र की सिंचित और अगेती बुवाई करने के लिए अनुसंशित की गई है।

इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति एकड से अधिक बताई गई है। हालाँकि, वास्तविक उपज कई सिद्धांतों पर निर्भर करती है। मिट्टी की स्थिति, समुद्रतट, मौसम और फसल का प्रबंधन में अहम भूमिकाएँ निभाती हैं।

एचडी 3226 अर्थात पूसा यशस्वी

HD 3226 को पूसा यशस्वी के नाम से जाना जाता है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्र में समय पर बुवाई के लिए अनुसंशित की गई है। भारतीय अनुसंधान कृषि परिषद (ICIR) के गोदाम से इसकी औसत उपज करीब 57.5 औसत प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

इस किस्म के दानों में लगभग 12.8 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता इसकी एक और विशेषता है। इसमें पीला, भूरा और काला रतुआ शामिल है जिसमें कई प्रमुख कीटों के प्रति भी अच्छी उपज क्षमता शामिल है।

DBW 187 अर्थात् करण वन्दन

DBW 187 को करण वन्दन के नाम से भी जाना जाता है। यह करीब 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है. पीले और भूरे रतुआ जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बताई गई है।

यह क्षेत्र पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल सहित उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों के लिए निर्धारित है। इनमें सिंचित क्षेत्र और समय पर बुवाई के दौरान इसकी औसत उपज क्षमत 64.70 प्रति प्रति एकड़ बताई गई है।

इस किस्म का चयन करने से पहले किसान अपने क्षेत्र के लिए जारी कृषि मौसम की जानकारी अवश्य लें। इसकी क्षेत्रीय खरीददारी को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।

बुआई से पहले बीज और खेत की तैयारी

बुवाई से पहले खेत की तैयारी और बीज की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्वस्थ्य बीज का प्रयोग करें और अंकुरण से पहले बीज उपचार, कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल पर दिए गए अनुसार जानकारी प्राप्त करें।

बीज दर लगभग 40 किलो बीज प्रति एकड की मात्रा बताई गई है। क़तरों के बीच 22 से 25 से.मी. की दूरी। हालाँकि, बीज विधि की वास्तविक मात्रा शक्ति और अंकुरण की मात्रा के अनुसार परिवर्तन हो सकता है।

खाद में प्रयुक्त मिट्टी की जांच और फसल की आवश्यकता के आधार पर जांच की जानी चाहिए। किसी भी फसल की शुरुआत में, मिट्टी में मौजूद उपादान और मौसम पर ध्यान केंद्रित करें।

किसान अपने क्षेत्र के लिए सही किस्म कैसे चुनें?

पांचों किस्मों की विशेषताएं अलग-अलग हैं। DBW 303 और WH 1270 अगेती कलाकारों के आवेदन से विचार करने योग्य हैं। DBW 327 में मजबूत ताना इसकी विशेषता है। एचडी 3226 में प्रोटीन की मात्रा और रतुआ बॉयलर की प्रति प्रतिरोधक क्षमता बताई गई है। DBW 187 के परिपक्व होने की अवधि करीब 120 दिन है।

किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मौसम के अनुसार बीज की बुवाई करनी चाहिए। स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विश्वविद्यालय से बीज की दुकान की पुष्टि बेहतर बोने के लिए। किसी भी कारखाने में बताई गई किसी भी प्रजाति को हर खेत में मिलने वाला निश्चित उत्पादन नहीं होना चाहिए।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।