
सरसों की खेतीः बुवाई का उचित समय, बीज दर, खाद और रोग प्रबंधन Publish Date : 07/11/2026
सरसों की खेतीः बुवाई का उचित समय, बीज दर, खाद और रोग प्रबंधन
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौघरी
सरसों की बुवाई बारानी (बिना सिंचाई) खेत में सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक और सिंचित खेत में लगभग 10 से 25 अक्टूबर तक कर देनी चाहिए। पूर्वी राज्यों में अक्टूबर के अंत से नवंबर के मध्य तक चलती है। इसकी बीज दर 1.5 से 2 किलो प्रति एकड़ लगता है।
इस समय नवम्बर का महीना चल रहा है, यानी उत्तर भारत में सरसों की खेती शुरू करने का समय अभी है।
बुवाई से पहले के कृषि कार्य
सरसों की बुवाई करने से पहले ये चार काम अवश्य निपटा लेने चाहिए। अपने इलाके की बुवाई तारीख तय करना, प्रमाणित बीज और बीज उपचार का इंतजाम, मिट्टी में सल्फर और जिंक की जरूरत जांचना, और खेत में नमी देखना। बाकी काम कतार में होते जाते हैं। कोई उलझन हो तो नजदीकी KVK से मिट्टी जांच की सलाह जरूर लें।
सरसों की बुवाई का उचित समय
सरसों की बुवाई का सही समय आपके क्षेत्र की जलवायु और सिंचाई की उपलब्धता पर आधारित होता है। उत्तर-पश्चिम भारत (राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब) में बारानी खेत के लिए सितंबर का अंतिम सप्ताह से अक्टूबर का पहला सप्ताह ठीक रहता है, बशर्ते खेत में नमी हो। सिंचित खेत में 10 से 25 अक्टूबर के बीच बोना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
सरसों के बहुत जल्दी बोने में दिक्कत यह है कि तापमान अभी ऊंचा रहता है और पेंटेड बग जैसे कीट शुरू में ही पौधों को पकड़ लेते हैं। बहुत देर करने पर फूल और फली भराव के समय ठंड-पाला और माहू का दौर आ जाता है, जो पैदावार खाता है। इसलिए तारीख को आगे-पीछे करना हो तो पहले अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के विशेषज्ञों से बात करें।
खेत और मिट्टी की तैयारी
सरसों की खेती के लिए हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी चाहिए जिसमें पानी न ठहरता हो। मिट्टी का पी.एच. लगभग 6 से 7.5 हो तो ठीक रहता है। खारी या जलभराव वाली जमीन में अंकुरण की दर कमजोर रहती है।
खरीफ फसल कटने के बाद एक गहरी जुताई और फिर दो बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएं। आखिर में पाटा लगाकर खेत समतल करें, क्योंकि सरसों का बीज बहुत छोटा होता है और ऊबड़-खाबड़ खेत में गहरा दब जाता है। बुवाई के समय खेत में हल्की नमी रहे। सूखे खेत में बोकर ऊपर से पानी देने से पपड़ी बन जाती है और अंकुरण कम होता है।
जितनी सड़ी हुई गोबर की खाद आराम से मिल सके (सामान्यतः 4 से 8 टन प्रति एकड़), जुताई से पहले डालें। कच्ची खाद दीमक को बुलाती है, इसलिए सड़ी हुई ही लें।
सरसों में बीज दर
राई (भारतीय सरसों) में सामान्यतः 1.5 से 2 किलो बीज प्रति एकड़ काफी है। यह लगभग 4 से 5 किलो प्रति हेक्टेयर के बराबर है। हाइब्रिड बीज में कंपनी की पैकिंग पर लिखी मात्रा मानें, वह अक्सर थोड़ी कम होती है।
बीज को रेत या सूखी मिट्टी में 1:4 मिलाकर बोएं, इससे बीज बराबर गिरता है। छिटकवां बुवाई में पौधे गुच्छों में उग आते हैं, इसलिए सीड ड्रिल या कतार वाली बुवाई बेहतर है। भीड़ वाले पौधे 15 से 20 दिन पर निकाल दें। यह मेहनत का काम लगता है, पर फली और दाने के आकार पर सीधा असर डालता है।
सरसों की उन्नत किस्मों की बात करें तो इनमें Pusa Mustard 28, RH 749 और NRCHB 101 जैसे अन्य कई नाम राई वर्ग में चर्चा में रहते हैं। कौन सी किस्म आपके जिले में चलती है, यह राज्य कृषि विश्वविद्यालय या KVK की सूची से मिलाकर चुनें। बीज हमेशा प्रमाणित और बिल का लें। 1 बीघा में कितना बीज लगेगा यह आपके राज्य के बीघा पर निर्भर है, क्योंकि बीघा हर जगह बराबर नहीं होता। एकड़ की मात्रा को अपने बीघा के अनुपात से बांट लें।
बीज उपचार
बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करना सबसे अच्छी पौध सुरक्षा है, क्योंकि जड़ गलन और अंकुरण के समय की बीमारियां यहीं से रुक जाती हैं। मात्रा हमेशा उस दवा के पैक पर लिखी प्रति किलो बीज की दर से की जानी चाहिए।
उपचार के बाद बीज को छाया में सुखाएं और उसी दिन बुवाई कर देनी चाहिए। जिन खेतों में पिछले साल सफेद रोली या जड़ सड़न की दिक्कत रही हो, वहां मिट्टी में जैविक फफूंदनाशक (ट्राइकोडर्मा) का उपयोग भी किया जा सकता हैं। मिट्टी में डालने के लिए बना Mustard Unnati Soil Kit इसी काम में आता है। लेबल के अनुसार इसमें छच्ज्ञ बायो कंसोर्शिया (1.5 से 2 किलो प्रति एकड़), ट्राइकोडर्मा (1 से 2 किलो प्रति एकड़), भूमिराजा VAM (4 से 8 किलो प्रति एकड़), माहू के लिए Vasiatha दानेदार कीटनाशक (2.5 किलो प्रति एकड़) और 200 ग्राम मिक्स माइक्रोन्यूट्रिएंट प्रति एकड़ है।
सरसों में खाद का प्रयोग
सिंचित सरसों में सामान्यतः 40 से 50 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस, 10 से 15 किलो पोटाश और करीब 16 किलो सल्फर प्रति एकड़ दिया जाता है। बारानी में नाइट्रोजन लगभग आधा रखें। सटीक मात्रा मिट्टी जांच से तय करें, यह सिर्फ आम आधार है।
सरसों तिलहन वाली फसल है और तेल बनाने में सल्फर बड़ा काम करता है। सल्फर की कमी में नई पत्तियां पीली-सफेद पड़ती हैं और दाने में तेल घटता है। इसे आधार खाद के साथ ही दे दें। देर से याद आने पर कमी ठीक करना मुश्किल होता है।
जिंक की कमी वाली मिट्टी में पत्तियों की नसों के बीच पीलापन आता है। लेबल के अनुसार जिंक सल्फेट मिट्टी में 4 से 5 किलो प्रति एकड़ दिया जा सकता है, या पत्तों पर 3 से 5 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में। छिड़काव का पहला चरण बुवाई के 20 दिन बाद और दूसरा उसके 25 दिन बाद होता है। जिंक और फास्फोरस एक साथ ज्यादा डालने से एक-दूसरे का असर कम होता है, इसलिए दोनों को एक ही बार में न मिलाएं।
फूल आने के समय बोरोन की कमी से फली कम बनती है और दाने भरते नहीं। बोरोन उर्वरक का लेबल पत्तों पर 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बताता है, फूल आने और फली बैठने के चरण में, 15 से 20 दिन के अंतर पर 2 से 3 छिड़काव तक। लेबल की सूची में सरसों अलग से नहीं लिखा, पर वही कमी का पैटर्न है, इसलिए मात्रा को लेबल के अनुसार ही रखें और जिन खेतों में पहले कमी दिखी हो वहीं करें।
सरसों में सिंचाई कब और कितनी

सरसों को 2 से 3 सिंचाई चाहिए, और सबसे जरूरी दो चरण हैं: बुवाई के लगभग 25 से 30 दिन बाद जब शाखाएं निकलती हैं, और लगभग 60 से 70 दिन के आसपास जब फलियों में दाना भरता है। खेत में बुवाई के बाद पहली बार पानी तभी दें जब जमाव ठीक हो चुका हो और जमीन ऊपर से सूखने लगे।
तेज धार वाला पानी न लगाएं, हल्की सिंचाई करें, खासकर फूल आने के समय। कोहरे या पाले की रात की संभावना हो तो हल्का पानी लगाने से पाले का असर कुछ कम होता है। जलभराव सरसों को ज्यादा नुकसान करता है, इसलिए पानी रुकने की जगह खोद कर निकास बना दें।
सरसों में माहू, सफेद रोली और छाछया आदि का उपचार
माहू (एफिड) दिसंबर से फरवरी के बीच, बादल और ठंड वाले मौसम में सबसे ज्यादा आता है। यह फूल की डंडी और फली से रस चूसता है और काला चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है। लगभग 25 से 30 माहू प्रति 10 सेमी शीर्ष भाग दिखें तो दवा का समय माना जाता है। हफ्ते में एक बार खेत के कोने और बीच से 10 पौधे देखना आदत बना लें।
माहू की दवा के लिए आपके इलाके के कृषि विभाग की सरसों के लिए पंजीकृत दवा ही चुनें और लेबल पर सरसों लिखा देखें। फूल के दौरान मधुमक्खियां सरसों पर काम करती हैं, इसलिए छिड़काव शाम को करें और फूल पूरे खिले होने पर तेज रसायन से बचें।
सफेद रोली (सफेद रस्ट) में पत्तियों के नीचे सफेद उभरे धब्बे बनते हैं और फूल की डंडी टेढ़ी होकर फूल जाती है। नमी और ठंडी रातों में यह फैलती है। लेबल के अनुसार Metalaxyl + Mancozeb का सरसों में डाउनी मिल्ड्यू और सफेद रोली पर उपयोग लिखा है। खुराक प्रोडक्ट पेज और पैक के लेबल से पढ़कर ही लें, और रोग दिखते ही पहला छिड़काव करें, तब तक नहीं रुकें जब पूरा खेत फैल चुका हो।
छाछया (पाउडरी मिल्ड्यू) में पत्तियों पर सफेद आटे जैसी परत जमती है, जो अक्सर फरवरी-मार्च में दिखती है। इसके लिए सल्फर आधारित फफूंदनाशक सामान्यतः चलते हैं, पर पंजीकृत दवा और खुराक कृषि विभाग की सिफारिश से प्रयोग करना चाहिए
ध्यान रखें: छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। दवा बच्चों और जानवरों से दूर रखें, खाली पैकेट खेत में न छोड़ें। लेबल पर लिखी कटाई से पहले की प्रतीक्षा अवधि (PHI) का पालन करें। जहर के असर का शक हो तो तुरंत डॉक्टर या पॉइज़न हेल्पलाइन को फोन करें और पैक का लेबल साथ ले जाएं।
सरसों की कटाई और पैदावार
जब करीब 75 से 80 प्रतिशत फलियां पीली-भूरी हो जाएं और दाने सख्त हों तो कटाई शुरू करें। पूरी फली सूखने तक रुकना खतरनाक है, क्योंकि फली चटक कर दाने खेत में गिर जाते हैं। सुबह के समय काटें, जब ओस से फली थोड़ी नरम रहती है।
काटने के बाद फसल को 4 से 7 दिन खेत में या खलिहान में सुखाएं, फिर उसकी गहाई करनी चाहिए। दाने में 8 प्रतिशत के आसपास नमी हो तो भंडारण सुरक्षित रहता है।
पैदावार किस्म, बुवाई के समय और प्रबंधन पर निर्भर है। देश में औसत लगभग 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ के आसपास माना जाता है, और अच्छे प्रबंधन में उन्नत या हाइब्रिड किस्मों से 8 से 10 क्विंटल तक की बात होती है। इसे पक्का आंकड़ा न मानें, यह इलाके और साल के मौसम के हिसाब से बदलता है।
अगर आपके यहां गेहूं भी रबी में है तो उसकी खाद का समय भी इसी दौरान आता है, उसके लिए गेहूं में खाद कब डालें देखें। रबी की दलहन फसल के लिए मटर की खेती का लेख अलग है।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।
