
गन्ने की पैदावार और वजन बढ़ाने के प्रभावी उपाय Publish Date : 19/10/2026
गन्ने की पैदावार और वजन बढ़ाने के प्रभावी उपाय
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ने की खेती में गन्ने की उपज (पैदावार) और वजन बढ़ाने के लिए खाद का सही समय पर उचित प्रबंधन, सही प्रजाति का चयन और अन्य कृषि कार्य बहुत जरूरी है।
1. खाद एवं पोषक तत्त्व प्रबंधन (उर्वरक प्रबंधन)
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3 से 4 महीने की फ़सल (प्रति एकड़): यूरिया 50 से 60 किग्रा., 25 से 30 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (एमओपी) और 10 किग्रा. जैविक खाद को गन्ने की क़तारों में देना सुनिश्चित् करें।
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5 से 6 महीने की फसल (प्रति माह): फसल की इस समय अवधि में 25 से 30 किलो पोटाश (एमओपी) और 10 किलो जिंक का वजन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पोटाश का प्रयोग करने से गन्ने का वजन बढ़ता है।
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सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स): सूक्ष्म पोषक तत्व एनपीके (जैसे 19-19-19 या 05234) और सीवीड एक्सएसिड का विषाक्त पदार्थों के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।

2. सिंचाई का उचित प्रबंधनः
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खेत में पानी भरना (जलभराव) जरूरी नहीं है।
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आरंभिक स्तर पर नियमित रूप से पानी देने पर फसल की परिपक्वता के समय की पानी आपूर्ति को कम किया जाए ताकि चीनी के परते और गन्ने के वजन में अपेक्षित सुधार हो सके।
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गन्ने की कटाई करने से 4-5 दिन पहले एक सिंचाई करने से कटाई के समय गन्ने का वजन और एसकी मिठास सही बनी रहती है।
3. स्ट्रोक और क़तार की दूरी (स्पेसिंग):
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गन्ने की कतारों के बीच 1.2 से 1.5 मीटर की दूरी सुनिश्चित करें। अधिकाँश कतारों के बीच की दूरी कम होने से पौधों का विकास कम होता हैं जिससे अधिकांश पौधे छोटे रह जाते हैं और गन्ने का कुल वजन भी कम हो जाता है।
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हमेशा 8 से 10 महीने पुराने, स्वस्थ और रोगमुक्त बीज (टकुड़ों का 2-3 आँख वालें) का चुनाव बुवाई के लिए करें।

4. खरपतवार नियंत्रण एवं गुड़ाईः
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गन्ने की बुवाई करने के बाद शुरुआती 3 महीने में खेत को पूरी तरह से खरपतवार से मुक्त कर लेना चाहिए।
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फसल जब करीब 45 से 50 दिन की हो, तो जुताई और गुड़ाई करें ताकि कल्ले (टिलरिंग) अच्छी संख्या में निकल सके।
5. गन्ने काटने का सही तरीका
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खेत की कटाई हमेशा जमीन की सतह से करनी चाहिए।
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सुबह या दोपहर के बाद कटाई करें और कटे हुए पौधों को तुरंत धूप और हवा से बचाएं ताकि सूखने के कारण उनका वजन कम न हो।
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किसान भाई गन्ने का वजन बढ़ाने के लिए अपनाएं ‘पताई’ ट्रिक! कटाई से पहले और बाद में सिंचाई न भूलें, ये है सही तरीका।
किसान भाईयों, इन दिनों उत्तर भारत के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कटाई का काम जोरों पर है, और किसान अब बेहतर उपज और वज़न बनाए रखने के लिए कटाई के दौरान अपेक्षित सावधानी भी बरत रहे हैं। गन्ने का सही वज़न बनाए रखने के लिए खेत से मिल गेट तक हर चरण पर उचित प्रबंधन बेहद जरूरी है, जिसमें कटाई से पहले हल्की सिंचाई, कटाई के दौरान गन्ने की मिट्टी और नमी का ख्याल रखना और कटे हुए गन्ने को तुरंत पताई या तिरपाल से ढकना आदि शामिल होता है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ के कृषि विशेषज्ञ डॉ0 आर. एस. सेंगर के अनुसार गन्ने की कटाई ज़मीन की सतह से करनी चाहिए ताकि पेड़ी की फसल अच्छी रहे, और कटाई सुबह जल्दी या दोपहर बाद करने से गन्ने के वज़न और मिठास बनाए रखा जा सकता है।
किसान अपनी मेहनत और उपज का सही मूल्य तभी पा सकते हैं जब खेत में नमी बनाए रखी जाए, गन्ने को सीधे धूप और हवा के संपर्क में आने से बचाया जाए, और कटाई के चार-पांच दिन पहले हल्की सिंचाई की जाए, जिससे गन्ने की कटाई के समय उसका वजन और गुणवत्ता दोनों बेहतर बने रहें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।