धान में बौनापन, वायरस से रहें सतर्क      Publish Date : 28/09/2026

       धान में बौनापन, वायरस से रहें सतर्क

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

अपने धान के खेत में अगर धान के कुछ पौधे अचानक छोटे रह जाएं, पत्तियां कड़ी दिखें और कल्ले भी अधिक निकलते दिखाई दें तो सावधान हो जाएं। यक्त लक्षण वायरस संक्रमण से जुड़े हुए भी हो सकते हैं। ऐसे में धान की फसल को यूरिया की अधिक खुराक न दें और इस दौरान आप तना छेदक व दूसरे कीटों की निगरानी करते रहें।’

धान की फसल में इस समय कल्ले निकल रहे हैं। पौधों का विकास दर इस चरण में किसान स्तर के पोशण संतुलित उपयोग, खेत में नमी के सही ध्यान दें। इस अवस्था में तना छेदक, हिस्पा, जीवाणु झुलसा रोग और पत्ती खाने वाले कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में पौधों का बौना रह जाना की समस्या भी सामने आ रही है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. शालिनी गुप्ता सलाह देती हैं कि किसान खेत की नियमित निगरानी करते रहें। रोग या कीटों के प्रभाव के शुरुआती लक्षण दिखते ही उनका प्रबंधन करना शुरू कर दें। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सर्दी-गर्मी में लव-ट्रीटेड इत्यादि वायरस को लेकर भी सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। समय पर सही पहचान और समेकित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नाइट्रोजन, जिंक और पोटाश की भी दें सही डोज

जीवाणु झुलसा रोग और पत्ती धारी रोग से बचाव के लिए खेत में नाइट्रोजन उर्वरक यूरिया की अधिक मात्रा न डालें। मिट्टी की जांच के आधार पर यूरिया, पोटाश और जिंक जैसे पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करें। रोग का प्रकोप बढ़ने पर स्ट्रेप्टोमाइसिन या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग स्थानीय अनुशंसा और लेबल निर्देशों के अनुसार करें।

धान के पौधों का दुश्मन है यह कीट

धान में तना छेदक कीट पौधे के तने में घुसकर उसके अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती अवस्था में बीच की पत्ती सूखकर डेड हार्ट जैसी दिखाई देती है। बाली बनने पर सफेद और टांग रहित वाली यानी ‘व्हाइट ईयर’बन सकती है। समय पर रोकथाम, संतुलित खाद और यूरिया का सीमित इस्तेमाल करें। खेत को खरपतवार मुक्त रखें और प्रकाश प्रपंच टूल नष्ट करें। निगरानी के लिए प्रति हेक्टेयर 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं।

तना छेदक के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत हो जाएं अलर्ट

तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई देने पर बिना जांच के दवा का छिड़काव न करें। क्लोरएंथ्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत जीआर, फ्लूबेंडामाइड 39.35 एससी या इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी जैसे विकल्पों का उपयोग स्थानीय अनुशंसा और उत्पाद के लेबल के अनुसार किया जा सकता है। ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम जैसे जैविक नियंत्रण उपाय भी उपयोगी सिद्व होते हैं। निर्धारित मात्रा से अधिक दवा बिल्कुल भी प्रयोग न करें।

बौने पौधों को उखाड़कर तत्काल कर दें नष्ट

धान के पौधे छोटे रह जाएं, अधिक कल्ले निकलें और पत्तियां गहरे हरे, मोटी व सीधी दिखें तो सतर्क रहें। ऐसे लक्षण सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस से जुड़े हो सकते हैं। यह वायरस सफेद पीठ वाले प्लांट हॉपर से फैल सकता है। बीने पौधों को उखाड़कर नष्ट करें और कीट की जांच करें। प्रकोप अधिक होने पर कृषि विभाग की सलाह लें। ट्राइकोग्रामा 10 एसपी पर ट्राइकोग्रामा का 20 एसपी का प्रयोग करें।

पत्ती खाने वाले कीटों की करें निगरानी

हिस्पा और पत्ती खाने वाले कीट धान की पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके प्रकोप से पत्तियों पर खुरचने के निशान, सफेद धारियां या पत्तियों के सूखने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। पत्तियों के प्रति होने पर इमामेक्टिन बेंजोएट 10 एसजी या क्लोरएंथ्रानिलिप्रोल 20 एससी जैसे अनुशंसित विकल्पों का प्रयोग करें। दवा का चुनाव फसल की अवस्था और उत्पाद के लेबल के अनुसार करें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।