गन्ना और मक्का की सहफसली से दोगुनी आमदनी प्राप्त करें      Publish Date : 14/09/2026

गन्ना और मक्का की सहफसली से दोगुनी आमदनी प्राप्त करें

                                                                                   प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए इस समय गन्ना और मक्का की मांग काफी बढ़ चुकी है। मक्का की फसल गन्ने के मुकाबले कम समय अवधि में तैयार हो जाती है। वहीं, गन्ने की वृद्धि धीमी होती है, जिसके साथ 50 फीसदी क्षेत्र में मक्का पैदा करके किसान दोगुनी आमदनी प्राप्त कर अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं।

भारत  में गन्ने की खेती करीब 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। देश में यूपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं। गन्ने की फसल 10-15 महीने में तैयार होती है, जिससे किसानों को साल में केवल एक बार ही आय मिल पाती है। चीनी मिलें भी 3 से 5 महीने तक ही चलती हैं, जिससे इथेनॉल का उत्पादन सीधे तरीके से बाधित होता है। भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण का जो लक्ष्य रखा था, जो कि अब पूरा हो चुका है। इस प्रकार से इथेनॉल के कुल उत्पादन में करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी मक्का की है और लगभग 40 प्रतिशत योगदान गन्ने का है।

भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईएमआर) ने पाया है कि गन्ना के साथ मक्का की सह-फसली खेती करने से से इथेनॉल भट्टियों को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती हैं। इसके साथ ही गन्ना और मक्का की मिश्रित खेती कर किसान भाई अपनी आय को भी बढ़ा सकते हैं।

एक लाभकारी खेती और मुनाफे का मॉडल

महाराष्ट्र, हरियाणा और यूपी में आईसीएआर-आईआईएमआर के वैज्ञानिकों ने गन्ने के धीमे प्रारंभिक विकास चरण का लाभ उठाकर कम अवधि में परिपक्व होने वाली संकर मक्का की किस्में विकसित की हैं, जो करीब 100 दिन में पक कर तैयार हो जाती हैं। इससे लगभग समान संसाधनों जैसे कि पानी, उर्वरक, खरपतवारनाशी और कीटनाशकों आदि का उपयोग करके एक साथ दो फसलें उगाई जा सकती हैं।

गन्ना और मक्का की सहफसली खेती

जैसा कि हम सब जानते ही हैं कि मक्का एक कम अवधि वाली फसल है, जो गन्ने के साथ सहफसली खेती के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। खेत की मिट्टी की उत्पादकता बढ़ाने, ड्यूल-फीड वाली इथेनॉल भट्टियों के लिए साल भर फीडस्टॉक आपूर्ति और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ मक्का की सहफसली खेती बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है।

गन्ने के साथ मक्का की खेती एक लाभदायक का सौदा

भारत में करीब 55 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है। देश में लगभग 500 चीनी मिलें हैं, जहां गन्ने के साथ मक्का की खेती भी कर सकते हैं। गन्ने के साथ 50 प्रतिशत के क्षेत्र में मक्का की फसल लगा सकते हैं। इससे प्रति एकड़ 15-20 क्विंटल मक्का का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण के लिए अतिरिक्त 45 प्रतिशत इथेनॉल मक्का से बनाया जा रहा है। इथेनॉल कीमत वाली इंडस्ट्री को बढ़ावा मिले तो गन्ने और मक्का के होने पर ज्वार या अन्य अनाजों से इथेनॉल को बनाया जा सकता है।

मक्का की टॉपिंग हटाने से मिलेगा लाभ

गन्ने के साथ मक्का की सहफसली के अन्तर्गत फसल प्रबंधन की एक खास तकनीक अपनाई जाती है। इसमें 33-50 प्रतिशत मक्का घनत्व बनाए रखना, यूरिया की अतिरिक्त टॉप-ड्रेसिंग और भुट्टे निकलने वाली अवस्था में मक्का की टॉपिंग हटाने जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। टॉपिंग हटाने से गन्ने को सूर्य का भरपूर प्रकाश मिलता है। इसके साथ ही पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा भी प्राप्त होता है। उच्च गुणवत्ता के मक्का के भुट्टों को मृत स्थान पर ही सुखाने से भी दाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

प्रति हेक्टेयर एक लाख तक अधिक लाभ मिलता है

मिश्रित खेती करने की इस तकनीक को अपनाने से गन्ने के समतुल्य उपज में 28 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। साथ ही, 3.5 से 5 टन प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त मक्का का उत्पादन भी मिलता है। इससे किसान का शुद्ध लाभ ₹50,000-1,00,000 प्रति हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। गन्ने के साथ मक्का की खेती की लागत अकेले मक्का की खेती की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

खेती और मक्का की मिश्रित या अंतरफसल (इंटरक्रॉपिंग) खेती से किसानों को अतिरिक्त आय, मिट्टी की उर्वरता में सुधार और सुविधा का बेहतर उपयोग जैसे कई बड़े लाभ मिल सकते हैं। इस स्मार्ट फार्मिंग मॉडल के प्रमुख लाभ नीचे दिये जा रहे हैं-

गन्ना और मक्का की सहफसली खेती के कुछ प्रमुख लाभः

मक्का की फसल कम समय अवधि में तैयार हो जाती है, जिससे कि प्लांट के मुख्य संयंत्र से पहले ही किसानों को आय मिलना शुरू हो जाती है।

लागत में कमीः दोनों उद्यमों की जुताई, निराई-गुड़ाई और साथ-साथ होने से अलग-अलग दोनों की लागत बहुत कम हो जाती है।

भूमि और जल का अधिकतम उपयोगः गन्ने की खेी की प्रारंभिक अवस्था में छोटे और दूर-दूर के पौधे होते हैं, जिससे खाली जगह का उपयोग करके मक्का को उगाया जाता है और पानी और भूमि की वनस्पति बहुतायत हो जाती है।

कीटों पर नियंत्रणः मक्के की फसल को उगाने से गन्ने एवं मक्के दोनों के ही कीटों का लियंत्रण काफी आसान हो जाता है।

मिट्टी की संरचना में सुधारः अलग-अलग तरह की जड़ों से बनी मिट्टी की संरचना और उसकी संरचना को बनाए रखने की मिट्टी की उत्पादन क्षमता बेहतर होती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।