
भारत में मिर्च की खेती Publish Date : 26/08/2026
भारत में मिर्च की खेती
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
मिर्च भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है। मिर्च को कड़ी, आचार, चटनी और अन्य सब्जियों में मुख्य तौर पर प्रयोग किया जाता है। मिर्च में कड़वापन कैपसेसिन नाम के एक तत्व के कारण होता है, जिसे दवाइयों के तौर पर प्रयोग किया जाता है। मिर्च का मूल स्थान मैक्सिको और दूसरे दर्जे पर गुआटेमाला माना जाता है। भारत में मिर्चें 17वीं सदी में पुर्तगालियों के द्वारा गोवा लाई गई और इसके बाद यह पूरे भारत में बड़ी तेजी से फैल गई। कैपसेसिन में बहुत सारी दवाइयां बनाने वाले तत्व पाए जाते हैं। खासतौर पर जैसे कैंसर रोधी और तुरंत दर्द दूर करने वाले तत्व पाए जाते हैं। यह खून को पतला करने और दिल की बीमारियों को रोकने में भी मदद करता है।
मिर्चें उगाने वाले एशिया के मुख्य देश भारत, चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, कोरिया, तुरकी, श्रीलंका आदि हैं। अफ्रीका में नाइज़ीरिया, घाना, टुनीशिया और मिस्र आदि। उत्तरी और केंद्री अमेरिका में मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि। यूरोप में यूगोसलाविया, स्पेन, रोमानिया, बुलगारिया, इटली, हंगरी आदि। दक्षिण अमेरिका में अर्जेनटीना, पेरू, ब्राज़ील आदि।
भारत, संसार में मिर्च पैदा करने वाले देशों में मुख्य देश हैं। इसके बाद चीन और पाकिस्तान का नाम आता है। आंध्र प्रदेश, महांराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा, तामिलनाडू, बिहार, उत्तर प्रदेश और राज्यस्थान मिर्च पैदा करने वाले भारत के मुख्य राज्य हैं।
मिट्टी
मिर्च हल्की से भारी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है। अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिस में नमी हो, इसके लिए अनुकूल होती है। हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं। मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की पी एच 6-7 अनुकूल है।
प्रसिद्ध किस्में और पैदावार
CH-1: यह किस्म PAU Ludhiyana द्वारा बनाई गई है। यह दरमियाने कद वाली किस्म है। इसका फल दरमियाने आकार और हल्के हरे रंग का होता है जो पकने के बाद गहरे लाल रंग का हो जाता है। इस किस्म का फल बहुत कड़वा और आकर्षित होता है। यह किस्म गलन रोग को सहने योग्य है। इसकी औसतन पैदावार 95-100 क्विंटल प्रति एकड़ है।
CH-3: यह किस्म पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी, लुधियाना द्वारा बनाई गई है। इसके फल का आकार सी एच-1 के आकार से बड़ा होता है। इसमें कैपसेसिन की मात्रा 0.52 प्रतिशत होती है। इसकी औसतन पैदावार 100-110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
CH-27: इस किस्म के पौधे लंबे होते हैं और ज्यादा समय तक फल देते हैं। इस किस्म के फल दरमियाने लंबे (6.7 से.मी.), पतले छिल्के वाले, शुरू में हल्के हरे और पकने के बाद लाल रंग के होते हैं। यह किस्म पत्ता मरोड़, फल और जड़ गलन, रस चूसने वाले कीट जैसे कि मकौड़ा जुंएं आदि की रोधक है। इसकी औसतन पैदावर 90-110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Punjab Sindhuri: इस किस्म के पौधे गहरे हरे, ठोस और दरमियाने कद के होते हैं। यह जल्दी पकने वाली किस्म है और इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75 दिनों के बाद की जा सकती है। इसके फल लंबे (7-14 से.मी.), मोटे छिल्के वाले, शुरू में गहरे हरे और पकने के बाद गहरे लाल रंग के होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 70-75 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Punjab Tej: इसके पौधे हल्के हरे, फैले हुए और दरमियाने कद के होते हैं। यह जल्दी पकने वाली किस्म है और इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75 दिन बाद की जा सकती है। इसके फल लंबे (6-8) से.मी., पतले छिल्के वाले, शुरू में हल्के हरे रंग के होते हैं जो पकने के बाद गहरे लाल रंग के हो जाते हैं। इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं। इसके फल 9-10 से.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत कड़वे होते हैं। यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 34 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 7 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है।
Pusa Sadabahar: इसके पौधे सीधे, सदाबहार (2-3 वर्ष), 60-80 से.मी. कद के होते हैं। इसके फल 6-8 से.मी. लंबे होते हैं। फल गुच्छों में लगते हैं और प्रत्येक गुच्छे में 6-14 फल होते हैं। पकने के समय फल गहरे लाल रंग के और कड़वे होते हैं। यह किस्म ब्डट, ज्डट और पत्ता मरोड़ की रोधक है। इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75-80 दिन बाद की जा सकती है। इसकी औसतन पैदावार 38 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 8 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है।
Arka Meghana: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है। इसके फलों की लंबाई 10.6 से.मी. और चौड़ाई 1.2 से.मी. होती है। इसके फल शरू में गहरे हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं। इसकी औसतन पैदावार 134 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है।
Arka Sweta: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और ताज़ा मंडी में बेचने योग्य है। यह सिंचित स्थितियों में खरीफ और रबी दोनों में उगाई जा सकती है। इसके फल की लंबाई 11-12 से.मी. चौड़ाई 1.2-1.5 से.मी. होती है। इसके फल नर्म और दरमियाने कड़वे होते हैं। फल शुरू में हल्के हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं। यह विषाणुओं को सहन योग्य किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 132 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है।
Kashi Early: इस हाइब्रिड किस्म के पौधे का कद लंबा (100-110 से.मी.) होता है। इसका तना टहनियों के बिना हल्का हरा होता है। इसके फल कड़वे, लंबे (8-9x1.0-1.2 से.मी.), आकर्षिक, शरू में गहरे हरे जो पकने के बाद चमकीले लाल हो जाते हैं। इस किस्म के हरी मिर्च की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 45 दिन बाद की जा सकती है। इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल (पकी हुई लाल) होती है।
Kashi Surkh: इस किस्म के पौधे छोटे कद के होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है। इसके फल हल्के हरे, सीधे, लंबे 11-12 से.मी. होते हैं। यह हरी और लाल दोनों तरह की मिर्चें उगाने योग्य किस्म है। इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है। इसमें हरी मिर्च की औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ है।
Kashi Anmol: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के (60-70 से.मी.) होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है और यह आकर्षिक, हरे, कड़वे फल पैदा करता है। इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है। इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Punjab Gucchedar: यह किस्म 1995 में जारी की गई है। इसके फल छोटे और गुच्छों में होते हैं। यह किस्म डिब्बाबंद पैकिंग के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
दूसरे राज्यों की किस्में:
Kashi Vishwanath
Sankeshwar: यह हल्के स्वाद वाली लंबी और लाल रंग वाली किस्म है। यह विशेष तौर पर निर्यात के लिए प्रयोग की जाती है।
Byadgi (Kaddi): यह हल्के स्वाद वाली लंबी और चमकीले लाल रंग वाली किस्म है।
Dabbi: यह हल्के स्वाद वाली लंबी और मोटी, काले रंग की किस्म है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
