
खरीफ में ज्वार की खेती कैसे करें Publish Date : 17/08/2026
खरीफ में ज्वार की खेती कैसे करें
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
परिचय
खेती करने के खरीफ सीजन के दौरान ज्वार की फसल सबसे अधिक महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है। ज्वार की सॉसेज में एक कटिंग से लेकर तीन-चार कटिंग देने की क्षमता है। गर्मी के मौसम में गर्मी के मौसम में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए क्योंकि गर्मी के मौसम में धूरिन नामक विषैले पदार्थ की मात्रा गर्मी के मौसम में अधिक हो जाती है। ज्वार का हरा कैरा, कड़वी और सिलेज़ के लिए उपयोगी होता है।
खेत की तैयारी
ज्वार की खेती वैसे तो सभी प्रकार की मिट्टी में आसानी से की जा सकती है, परन्तु दोमट, बलुई दोमट, मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। ज्वार के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करना आवश्यक है। सिंचित यूरोप में दो बार गहरी जुताई करके पानी का उपयोग करने के बाद बैटर आने पर दो जुताईयां करनी चाहिए।
ज्वार के लिए बुआई का समय
सिंचित क्षेत्रों में ज्वार की बुवाई 20 मार्च से 1- जुलाई तक, जिन फार्म हाउस में सील उपलब्ध नहीं है वहां पर अप्रैल के पहले पखवाड़े में कई कटिंग वाली सॉसेज/संकर सॉसेज की बुवाई करनी चाहिए। यदि सीना व खेत की पूर्ण तैयारी उपलब्ध नहीं है तो मई के पहले सप्ताह में भी ज्वार की बुवाई की जा सकती है।
चारे की अलग-अलग वस्तुएं
एक कटिंग वाली -हरियाणा चरी 136, हरियाणा चरी 171, हरियाणा चरी 260, हरियाणा चरी 307, पी.सासी-9 तथा अधिक कटिंग वाली खटाई-मीठी सूडान (एस एस एस जी 59-3), एफ, एस एच 92079 (सफेद मोती) आदि ज्वार की उन्नत किस्में हैं।
बीज एवं बीज की मात्राः जब आपका खेत भली प्रकार से तैयार हो तो ज्वार की बुवाई सीड ड्रिल से 2.5 से 4 सेमी गहराई एवं 25-30 अध्यापन की दूरी पर करनी चहिए। ज्वार के बीज का मात्रा, बीज की रेटिंग पर निर्भर करता है। बीज की मात्रा 18 से 24 कि.ग्रा. प्रति एकड़ के हिसाब से बुवाई करें। यदि खेत की तैयारी अच्छी न हो तो छिटकाव विधि से बीज की मात्रा में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि करना आवश्यक है। अधिक कटिंग वाली सलमान खान/संकर खरीदी के ली 8-10 लंबी दूरी के बीज प्रति एकड़ के हिसाब से लगाए गए।
खाद एवं गुणवत्ता
सिंचित क्षेत्रों में इस फसल के लिए 80 किग्रा. और 30 प्रति किग्रा. प्रति एकड की दर से प्रयोग करने की आवश्यकता होती है। फॉस्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा और एस एस पी की एक पूरी मात्रा बुवाई से पूर्व डालें और एक 30-35 में 50 किलोमीटर की मात्रा वाले बीजाई (112) प्रति हैक्टर बीजाई से पहले डालें। अधिक कटिंग लीज वाली सॉसेज से पहले व 30 किल डॉक्स प्रति हैक्टर हर कटिंग के बाद सीलैंड के बाद डॉक से अधिक पैडवार डॉक्युमेंट्स हैं।
वर्षा ऋतु में बोई गई फसल में आमतौर पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। मार्च अप्रैल में बीजाई फसल में पहली सिंचाई 15-20 दिन बाद और आगे की सिंचाई 10-15 दिन के अंतर पर करें। मई-जून में बीज बोने के 10-15 दिन बाद पहली बार सींच करें और बाद में आवश्यकता अनुसार करें। अधिक कटिंग वाली सामग्रियां में हर कटिंग के सीक्वेंस के बाद अवश्य देखें। इससे फुटाव जल्दी व अच्छा होगा।
खरपतवार नियंत्रण
ज्वार में खरपतवारों की समस्या विशेष रूप से वर्षाकालीन फसल में अधिक पाई जाती है। सामान्यतः गर्मियों में बीजी गई फसल में एक गुडाई पहली सिंचाई के बाद बैटर आने पर करनी चाहिए। अगर रिपल की समस्या ज्यादा हो तो एट्राजीन का सुझाव दें। क्योंकि चारे की चटनी में किसी भी प्रकार के रसायन के प्रोत्साहन को बढ़ावा नहीं दिया जाता है।
रोग एवं कीट नियंत्रण
चारे की फसल में खेती कम करनी चाहिए और खेती के बाद 25-30 दिन तक खेती नहीं करनी चाहिए।
कटिंग एवं एच.एस.आई. एन. का प्रबंधन:
चारे की अधिक निर्माण व गुणवत्ता के लिए कटिंग 50 प्रतिशत सिट्टे की शुरुआत करें। एच.एस.एन. ज्वार में एक साजिस्टर तत्व प्रदान करता है। यदि इसकी मात्रा 2000 पी.पी.एम. इससे अधिक हो तो यह समुद्र तट के लिए खरीदारी हो सकती है। 35-40 दिन की फ़सल में एच.एस.आई. एन की मात्रा अधिक होती है। लेकिन 40 दिन के बाद इसकी मात्रा अधिक होती है। लेकिन 40 दिन पहले नहीं लेना चाहिए। अगर कटिंग 40 दिन में करना बेहद जरूरी हो तो कटे हुए चारे को साथियों को से पहले 2-3 घंटे तक खुली हवा में छोड़ दें ताकि एच.एस.आई. एन. की मात्रा कुछ कम हो सके।
अधिक कटिंग वाली सॉसेज में हरे चारे की अधिक अवधि के लिए पहली कटिंग बीजाई के 50 से 55 दिन की अवधि एवं शेष सभी कटिंग बीजाई के 35-49 दिन के अंतराल पर करें। अगर पहली कटिंग देर से की जाए तो क्युरी चारे में बढ़ोतरी होती है लेकिन हरे चारे की पैडवार वक्विटी कम हो जाती है। अच्छे फुटाव के लिए फ़सल को ज़मीन से 8 -10 ऊँची रखें।
बीज का बनना
दाने वाली फ़सल के लिए बीजाई 10 जुलाई तक रुकें। इस समय बीजी गया फ़सल से दान की पदावली सबसे प्रमुख है। जल्दी छूट जाती है। जल्दी बिजी गई मछली में मिज़ कीट का आक्रमण इतना अधिक होता है कि डोन का रस क्रीड़ा से पैदावर काफी कम हो जाती है।
उत्पादन
चारे की उपज से 250-400 तक की लागत से 500-700 किवंटल प्रति हैक्टर प्राप्त हो सकते हैं।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
