
अगरवुड की खेती लाभकारी हरित पूँजी Publish Date : 11/08/2026
अगरवुड की खेती लाभकारी हरित पूँजी
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
अगरवुड (Agarwood) दुनिया की सबसे मूल्यवान सुगंधित लकड़ियों में से एक मानी जाती है। इसका उपयोग लक्ज़री परफ्यूम, अत्तर, अगरबत्ती, धूप, धार्मिक अनुष्ठानों, कॉस्मेटिक्स तथा कुछ पारंपरिक औषधीय उत्पादों में किया जाता है। इसी कारण इसकी वैश्विक मांग लगातार बनी रहती है।
इसकी इतनी मांग क्यों है?
दुर्लभ और सीमित उपलब्धता
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प्रीमियम परफ्यूम एवं अत्तर उद्योग में व्यापक उपयोग।
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धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व।
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कुछ उच्च-मूल्य औषधीय एवं वेलनेस उत्पादों में उपयोग।
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उच्च मूल्य वाला प्राकृतिक वन उत्पाद।
अगरवुड का उपयोग करने वाले प्रमुख ब्रांड एवं उद्योग
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Ajmal Perfumes
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Arabian Oud
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Abdul Samad Al Qurashi (ASAQ)
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Swiss Arabian
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Rasasi Perfumes
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Amouage
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Dior (चयनित लक्ज़री फ्रेगरेंस)
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Chanel (चयनित फ्रेगरेंस)
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Tom Ford (चयनित Oud Collection)
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Guerlain (चयनित Oud Collection)
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Acqua di Parma (Signatures of the Sun – Oud)
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Jo Malone London (Oud & Bergamot)
किन देशों में मांग है?
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UAE
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सऊदी अरब
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ओमान
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कतर
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कुवैत
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बहरीन
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जापान
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चीन
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दक्षिण कोरिया
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सिंगापुर
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मलेशिया
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इंडोनेशिया
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भारत
समृद्ध भविष्य की ओर
सही पौधों का चयन, वैज्ञानिक प्रबंधन और उचित इनोकुलेशन अगरवुड खेती की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं।
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग
पौधा उपलब्ध कराने से लेकर वैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं खरीद प्रक्रिया तक सम्पूर्ण सहयोग।
यदि एक एकड़ में लगभग 1000–1500 अगरवुड पौधे लगाए जाएँ और उनकी वैज्ञानिक तरीके से देखभाल, इनोकुलेशन तथा निर्धारित समय तक प्रबंधन किया जाए, तो 7–10 वर्षों में ₹3 करोड़ से ₹10 करोड़ तक का संभावित सकल मूल्य प्राप्त होने की संभावना हो सकती है। वास्तविक परिणाम खेती के प्रबंधन, पौधों की गुणवत्ता, बाज़ार मूल्य और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
आज एक सही निर्णय...
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कल समृद्ध भविष्य की ओर एक मजबूत कदम।
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अगरवुड की खेती – आज का पौधा, कल की हरित पूंजी!
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दीर्घकालीन वृक्ष आधारित खेती में अगरवुड एक संभावित उच्च-मूल्य वाला अवसर
अगरवुड (Aquilaria malaccensis) एक विशेष वृक्ष है, जिसकी लकड़ी में उपयुक्त परिस्थितियों एवं सफल इनोकुलेशन के बाद बनने वाला सुगंधित रेज़िन अत्यंत मूल्यवान माना जाता है। इसका उपयोग परफ्यूम, अगरबत्ती, धूप, कॉस्मेटिक्स तथा अन्य सुगंधित उत्पादों में किया जाता है।
एक एकड़ में कितने पौधे?
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500 पौधों का मॉडल
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लगभग 2 × 3 मीटर दूरी पर करीब 500 पौधे/एकड़ लगाए जा सकते हैं।
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1000 पौधों का सघन मॉडल
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लगभग 6.5 × 6.5 फीट दूरी पर करीब 1000 पौधे/एकड़ लगाए जा सकते हैं।
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वास्तविक पौध संख्या खेत के आकार, भूमि की बनावट, जल निकासी, जलवायु, प्रबंधन पद्धति एवं स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार निर्धारित करना उचित है।
प्रति एकड़ पौध निवेश:
500 पौधे: पौध लागत = 500 × पौध का वर्तमान मूल्य
1000 पौधे: पौध लागत = 1000 × पौध का वर्तमान मूल्य
इसके अतिरिक्त गड्ढा तैयारी, रोपण, सिंचाई व्यवस्था, रखरखाव, पोषण प्रबंधन, सुरक्षा तथा इनोकुलेशन आदि पर अलग से खर्च हो सकता है।
फसल अवधि: 7 से 10 वर्ष
अगरवुड को दीर्घकालीन वृक्ष फसल के रूप में देखा जाना चाहिए।
लगभग 7–10 वर्ष का समय प्रबंधन, वृक्ष की वृद्धि, स्थानीय परिस्थितियों और रेज़िन निर्माण की प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
सफल इनोकुलेशन एवं उचित बागान प्रबंधन के बाद व्यावसायिक स्तर पर मूल्यवान रेज़िन/अगरवुड उत्पादन की संभावना बनती है।
क्यों चुनें अगरवुड?
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दीर्घकालीन वृक्ष आधारित खेती
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उच्च मूल्य वाले रेज़िन की संभावना
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कम क्षेत्र में वृक्ष आधारित संपत्ति निर्माण का अवसर
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परफ्यूम एवं सुगंधित उत्पाद उद्योग में उपयोग
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आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित संपत्ति
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कृषि के साथ वैकल्पिक दीर्घकालीन आय का संभावित स्रोत
मल्टीप्लायर तकनीक के साथ पौध पोषण
अगरवुड बागान में शुरुआती पौध वृद्धि एवं मिट्टी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
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स्वस्थ जड़ विकास में सहयोग
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पौधों की शुरुआती स्थापना में सहायता
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जैविक कार्बन एवं मिट्टी की जैविक गतिविधि को बढ़ावा देने में सहायक
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पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाने में सहयोग
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दीर्घकालीन बागान प्रबंधन के लिए बेहतर मिट्टी वातावरण बनाने में सहायक
आज का पौधा… कल की हरित पूंजी-
अगरवुड की खेती कोई त्वरित कमाई वाली फसल नहीं है। यह लंबी अवधि की योजना, सही पौध सामग्री, उपयुक्त भूमि, वैज्ञानिक प्रबंधन, सफल इनोकुलेशन और भरोसेमंद बाजार पर आधारित वृक्ष खेती का अवसर है।
निवेश और उत्पादन से पहले स्थानीय कृषि/वन विभाग के नियम, पौध सामग्री की वैधता, इनोकुलेशन प्रक्रिया तथा संभावित खरीदार की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें।
अगरवुड लगाइए — हरित संपत्ति की दिशा में एक कदम बढ़ाइए!
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
