
रिजका की खेती करने की वैज्ञानिक विधि Publish Date : 05/08/2026
रिजका की खेती करने की वैज्ञानिक विधि
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
रिजका, जिसको ‘चारा फसलों की रानी’ भी कहा जाता है, साथ ही इसे लूसर्न के नाम से भी जाना जाता है। यह फल मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मानस के लेह क्षेत्र में सिंचित क्षेत्र में पाया जाता है। इसे रबी सीजन का एक महत्वपूर्ण फल माना जाता है।
विशेष रूप से जहां बेरीम के लिए पर्याप्त पानी नहीं है और बरसात का समय छोटा है। इसके गहरे रेगिस्तानी क्षेत्र के कारण यह शुष्क क्षेत्र में स्थित है। यह उच्च तापमान वाले क्षेत्र में बिना पानी के भी अच्छी तरह उगती है।
जलवायु और अनुकूलता
यह बहुवर्षीय, स्थिर और टिकाऊ सहनशील है। इसमें 15 प्रतिशत कच्चा प्रोटीन और 72 प्रतिशत सूखा पदार्थ पाचन क्षमता होती है। यह बरसीम की तुलना में लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध कराता है। समशीतोष्ण जलवायु की यह फसल कम तापमान में भी अच्छी तरह से उगाई जा सकती है।
उपयुक्त मृदा
रिजका के लिए अच्छे जल फूल वाली परत और तटस्थ पीएच वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसमें अम्लीय मिट्टी पर भी लगाया जा सकता है। भारी या जल जमाव वाली मिट्टी पर यह फसल सबसे बेहतर तरीके से विकसित होती है।
भूमि की तैयारी
रिजका के लिए समरूप और रूपरेखायुक्त बीज-बिस्टर जरूरी है। खेत की एक बार गहरी जुताई मोल्डिंग बोर्ड हल से और 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पता लगाना चाहिए। इससे बीज और मिट्टी के बीच अच्छा संपर्क होता है।
रिजके की उन्नत किस्में
रिजका की एडवांस्ड एलएलसी में सीयाचिया-8, आनंद-2, आनंद-3, आरी 88, सी-1, और टी-9 आदि रिजका की बेहतर किस्मों में शामिल की जाती हैं, जो कि बेहतरीन उत्पादन प्रदान करती हैं।
बुवाई करने का उचित समय
अक्टूबर के मध्य में रिजका की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, लेकिन इसे सितंबर के अंत से दिसंबर की शुरुआत तक भी बोया जा सकता है।
बीज मात्रा और बुवाई करने की विधि
लूर्सन की खेती में 20-25 किलोग्राम/हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है, जबकि पंक्तिबद्ध विधि में 12-15 किलोग्राम/हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है। बीज को 1.5 फीट से अधिक गहराई में नहीं बोना चाहिए।
कटाई
रिजका की पहली कटिंग बुवाई के लगभग 50-55 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद 25-30 दिन के अंतराल पर कटाई की जाती रहनी चाहिए।
उत्पादन
रिजका की फसल से साल भर में 8-10 बार कटाई की जा सकती है, जिससे प्रति हेक्टेयर 80-120 टन सूखा चारा और 18-20 टन सूखा चारा प्राप्त होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
