अच्छी कमाई के लिए अगस्त में ली जाने वाली फसलें      Publish Date : 01/08/2026

अच्छी कमाई के लिए अगस्त में ली जाने वाली फसलें

                                                                      प्रो0 आर. एस. सेंगर, डॉ0 शालिनी गुप्ता एवं गरिमा शर्मा

हमारे कृषि वैज्ञानिक प्रो0 राकेश सिंह सेंगर ने किसानों को अगस्त महीने में कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी है। डॉ0 सेंगर ने बताया कि कुल्थी दाल, धनिया, पालक, मेथी, मूली, लोबिया और अन्य बरसाती सब्जियां इस मौसम के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इन फसलों में पानी की खपत कम होती है और 30 से 60 दिनों में ही उत्पादन मिलने लगता है।

अगस्त का महीना किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आता है क्योंकि इस समय खेतों में पर्याप्त नमी मौजूद रहती है। मौसम भी कई तरह की फसलों की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में यदि किसान सही समय पर सही फसल का चुनाव करें तो कम लागत में अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं। कई किसान इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि अगस्त में कौन-सी फसल लगानी चाहिए, जिसमें लागत कम हो, जोखिम कम हो और मुनाफा अधिक मिल सके। ऐसे किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी फसलों की जानकारी दी है, जिनकी खेती इस मौसम में काफी लाभदायक साबित हो सकती है। खास बात यह है कि इन फसलों को तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता और स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़ी मंडियों में भी इनकी मांग लगातार बनी रहती है।

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय मेंरठ के प्रो0 आर. एस. सेंगर ने बताया कि अगस्त महीने में दलहनी फसलों की खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसान इस महीने कुल्थी दाल की खेती करें तो वह इस समय कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में कुल्थी दाल की मांग लगातार बनी रहती है। इस फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पानी की खपत भी बहुत कम होती है। इसके अलावा धनिया, पालक, मेथी, मूली, लोबिया और अन्य बरसाती सब्जियों की खेती भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। इन फसलों में शुरुआती लागत अपेक्षाकृत कम आती है। यदि किसान अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें, समय पर बुवाई करें और खेत की सही देखभाल करें तो कम समय में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

                                     

ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इन फसलों से 30 से 60 दिनों के भीतर उत्पादन मिलने लगता है और इसके लिए किसानों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता है और किसानों की आमदनी जल्द शुरू हो जाती है। यही कारण है कि ये फसलें छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती हैं।

बरसात में खेतों में पानी जमा न होने दें

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल सही फसल का चुनाव करना ही पर्याप्त नहीं होता है, खेती करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। बरसात के मौसम में खेतों में पानी जमा होना एक आम बात है जो कि सबसे बड़ी समस्या भी बन सकता है। यदि खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहे तो पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और इससे पूरी फसल के खराब होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। अतः किसान सबसे पहले खेत में जल के निकास की उचित व्यवस्था करें। इसके साथ ही मिट्टी की जांच कराकर आवश्यकता के अनुसार खाद और उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के बिना अधिक मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग करने से फसल को नुकसान हो सकता है।

इसलिए कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती करना अधिक लाभदायक रहता है, क्योंकि इससे खेती की लागत कम होती है और किसान का मुनाफा बढ़ता है।

समय-समय पर करें जरूरी कीटनाशकों का छिड़काव

                                 

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि फसल लगाने के बाद खेत की नियमित निगरानी करते रहें। बारिश के मौसम में कई प्रकार के कीट और रोग तेजी से फैलते हैं और यह कुछ ही दिनों में पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि समय रहते इनकी पहचान कर ली जाए और उचित दवा का छिड़काव किया जाए तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। इसके साथ ही खेत से खरपतवार की समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी है। खरपतवार फसल के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, इससे उत्पादन प्रभावित होता है। इस सम्बन्ध में कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेती में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर किसान अपनी लागत को नियंत्रित रख सकते हैं और साथ ही बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी प्राप्त कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।