
यूरिया का उचित प्रयोग यानी कि कम लागत में अधिक उत्पादन Publish Date : 01/06/2026
यूरिया का उचित प्रयोग यानी कि कम लागत में अधिक उत्पादन
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
समस्याः नाइट्रोजन क्यों होती है बर्बाद
अमोनिया का वाष्पीकरणः
जब किसान गर्म मौसम और सूखी मिट्टी में यूरिया का प्रयोग करते हैं तो पौधों को मिलने वाली नाइट्रोजन गैस के रूप में वायु में वाष्पित हो जाती है।
अनुचित योजना के होने के चलते होने वाली हानिः
त्रुटिः यूरिया को खेत में डालने के बाद सिंचाई में विलम्ब करना अथवा जलभराव की स्थिति में उपयोग करने से नाइट्रोजन की भारी हानि होती है।
अविवेकपूर्ण और अधिक मात्रा में प्रयोग करने के दुष्परिणामः

यूरिया का अधिक मात्रा में प्रयोग करने से फसलों की वृद्वि असंतुलित हो जाती है, इसके साथ ही कीट एवं रोगों के प्रकोप की आशंका भी बढ़ जाती है, तथा उत्पादन कम हो जाता है।
यूरिया का उपयोग करने की सही विधिः
मिट्टी में मिलाकर प्रयोग करनाः
- यूरिया उर्वरक को यदि मिट्टी में हल्के से मिलाकर प्रयोग किया जाए तो यह फसलों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है।
उपयोग करने का उचित समयः
किसान भाईयों को यूरिया का प्रयोग हमेशा सुबह अथवा शाम को करने को ही प्राथमिकता देनी चाहिए, साथ ही सिंचाई के साथ अथवा उसके बाद यूरिया का प्रयोग करना अधिक लाभकारी रहता है।
यूरिया का विभाजित प्रयोग:

किसान भाईयों से अपील है कि वह यूरिया की डोज एक बार में ही देने से बचें, बल्कि फसल वृद्वि के विभिन्न चरणों में थोडी-थोड़ी मात्रा में प्रदान करना चाहिए। ऐसा करने से फसले यूरिया का उपयोग अच्छे प्रकार से कर पाती हैं और यूरिया के लीचिंग की समस्या कम हो जाती है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।