गर्मियों में गन्ने की फसल की देखभालः एक महत्वपूर्ण जानकारी      Publish Date : 12/04/2026

गर्मियों में गन्ने की फसल की देखभालः एक महत्वपूर्ण जानकारी

                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गर्मियों में तापमान के अधिक होने के कारण गन्ने की फसल में विभिन्न प्रकार की समस्याएं आती हैं और अगर समस्याओं इन पर समय के रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इससे गन्ने के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

गर्मियों में आने वाली मुख्य समस्याएं

1. पानी की कमी (Water Stress): गर्मी में तापमान के अधिक होने के कारण खेत की मिट्टी जल्दी सूख जाती है, जिससे गन्ने की वृद्धि रुक जाती है।

2. पत्तियां जलना/सूखनाः तेज धूप के कारण पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पत्तियों के किनारे जल जाते हैं।

3. फुटाव (टिलरिंग) का कम होनाः फसल में नया फुटाव कम होता हैं और पुराने फुटाव कमजोर हो जाते हैं।

4. मिट्टी कठोर होनाः फसल में पानी की कमी के चलते खेत की मिट्टी कठोर हो जाती है और इससे जड़ों की वृद्धि कम हो जाती है।

5. कीट व रोग बढ़नाः गर्मियों में अर्ली शूट बोरर और स्केल कीट का प्रकोप बढ़ता है।

6. पोषक तत्वों की कमी होनाः नाइट्रोजन (Nitrogen) और पोटाश (Potash) की कमी से फसल की वृद्धि धीमी हो जाती है।

समस्या से बचाव के उपाय (Solution):

                         

1. पानी का सही प्रबंधन करें: गन्ने की फसल में 5-7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें, सिंचाई खेत की मिट्टी के प्रकार के अनुसार करना उचित रहता है।

2. मल्चिंगः गन्ने की सूखी पत्तियों से जमीन को ढककर रखें, इससे जमीन में नमी का स्तर उचित बना रहता है और तापमान भी कम रहता है।

3. जैविक खाद का उपयोगः गोबर खाद/कंपोस्ट डालने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है।

4. समय पर खाद पबन्धनः नाइट्रोजन (यूरिया) + पोटाश उचित मात्रा में फसल को प्रदान करें।

5. कीट नियंत्रण के उपाय करें: समय पर दवा का छिड़काव करके कीटों को नियंत्रित रखें।

6. मिट्टी को भुरभुरी बनाकर रखें: इसके लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें।

महत्वपूर्णः

  • गर्मियों में पानी + मिट्टी प्रबंधन करना सबसे अधिक आवश्यक है।
  • गन्ने की फसली की सही तरीके से देखभाल करने पर उत्पादन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।

अतः गर्मियों में गन्ने की फसल को तेज धूप और पानी की कमी से बचाने के लिए 7-10 दिनों के अंतराल पर हल्की और नियमित सिंचाई करते रहें। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए निराई-गुड़ाई करके खरपतवार निकालें और जून के अंत तक पौधों पर मिट्टी चढ़ा दें। उर्वरक के रूप में नाइट्रोजन की शेष मात्रा और पोटाश का प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करें।

गर्मियों में गन्ने की विशेष देखभाल के मुख्य बिंदुः

                             

सिंचाई प्रबंधनः गर्मियों में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए 7-10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई या सुबह-शाम सिंचाई करना सबसे बेहतर होता है।

निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रणः मिट्टी को नरम रखने और नमी संरक्षण के लिए निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है। अप्रैल-मई के महीनों में खरपतवार का नियंत्रण करने के लिए 2,4-डी का छिड़काव भी किया जा सकता है।

मिट्टी चढ़ाना (Earthing up): जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक गन्ने की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा दें। इससे गन्ने को सहारा मिलता है और फसल का फुटाव भी बढ़ता है।

पोषण प्रबंधनः नाइट्रोजन की बची हुई मात्रा (लगभग 50 किलो प्रति हेक्टेयर) टॉप ड्रेसिंग के रूप में डालें। इसके साथ ही, गन्ने की मोटाई और विकास के लिए पोटाश भी संतुलित मात्रा में अवश्य ही देना चाहिए।

कीट और रोग नियंत्रणः गर्मियों में चोटी बेधक (Top Borrer) और पायरिला जैसे कीटों का खतरा रहता है। इनके नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफॉस या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें।

ताजगी बनाए रखनाः फसल की कटाई के बाद भी गन्ने में नमी बनाए रखने के लिए उसे हरी पत्तियों से ढक कर रखें, इससे मिट्टी का तापमान और नमी उचित स्तर पर बनी रहती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।