धान की फसल में कृषि यंत्रों का महत्व      Publish Date : 09/03/2026

    धान की फसल में कृषि यंत्रों का महत्व

                                                            डॉ0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

भारत को एक कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है और यहाँ की अधिकांश जनसंख्या खेती पर आश्रित है। भारत में प्रतिवर्ष विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाता है। कभी-कभी वातावरण अनुकूल न होने तथा अन्य कारणों से फसलों के उत्पादन में भारी कमी हो जाती है। हालांकि कृषक अपनी फसल के बेहतर उत्पादन के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं जिसमें से धान की फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक शामिल हैं। कृषि यंत्रों से कृषकों को कम लागत लगानी पड़ती है और उत्पादन भी बढ़ता है। यह सभी कृषकों ने स्वीकार किया है कि लागत को कम करने के तरीकों में से एक तरीका मशीनीकरण भी है। धान की फसल में चार कृषि यंत्रों का उपयोग जैसे ड्रम सीडर, कोनो वीडर, ब्रश कटर और पैडी पेडल संचालित यंत्र द्वारा श्रम को भी बचाया जा सकता है और आय को भी दोगुनी किया जा सकता है। इस यंत्रों का उपयोग बुवाई से लेकर कटाई तक किया जा सकता है और दो कृषक इस काम को आसानी से कर सकते है।

ड्रम सीडर कृषि यंत्र का उपयोग

इस यंत्र से धान की सीधी बुवाई की जा सकती है। यह काफी सस्ता और आसान तकनीक वाला यंत्र है, इसको काफी आसान तरीके से बनाया गया है। इसका वजन 8-10 किलोग्राम होता है जिसे कृषक खेत में आसानी से उठाकर या चलाकर ले जा सकते हैं। इसमें दोनों किनारों पर प्लास्टिक पहिये बेलनकार लगे होते हैं, और चार प्लास्टिक के खोखले ड्रम लगे होते हैं जिनका व्यास लगभग 60 सेंटीमीटर का होता है। प्लास्टिक के खोखले ड्रम बीज रखने के लिए बने होते हैं। प्रत्येक प्लास्टिक ड्रम में 2-3 किलोग्राम बीज रखा जा सकता है। ड्रम सीडर से बुवाई के लिए सबसे पहले बीज को 12 घंटों के लिए पानी में छोड़ें, उसके बाद उपचार के लिए कार्बेन्डजीम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर जूट के बोरे से 20 घंटे के लिए छोड़ देते हैं। बीज में हल्का अंकुरण होने के बाद ही बुवाई के लिए खोखले ड्रम में रखें। प्लास्टिक के खोखले ड्रम में छिद्र बने होते हैं, जिससे बीज गुरुत्वाकर्षण केद्वारा गिरा करते हैं। बुवाई वाले खेत में पानी की मात्रा नहीं रहनी चाहिए, लेकिन खेत में कीचड़ होना जरुरी है। ड्रम सीडर कृषि यंत्र को खींचने के लिए एक हत्था भी लगा होता है जिससे कृषक सरल तरीके से इसे आसानी से खीच सके।

ड्रम सीडर से लाभ

  • इस यंत्र को एक आदमी आसानी से चला सकता है।
  • धान की फसल की अवधि 7-10 दिन कम होती है।
  • इस यंत्र को महिला कृषक भी चला सकती है।
  • खरपतवार नियन्त्रण आसानी से होता है।
  • इसके लिए टैक्टर की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
  • बीज शोधन करने के बाद छाया में सुखाकर कर गीले बोरों से ढक दें।
  • बीजों की बुवाई 5-6 घंटे के अन्दर कर देनी चाहिए, क्योंकि खेत की मिट्टी कड़ी होने लगती है।
  • बीज अंकुरित होने पर बुवाई करना चाहिए। ध्यान दें कि खेत में 2 से 5 इंच के बीच पानी रहने पर बुवाई करें।
  • अगर ड्रम सीडर से धान की सीधी बुवाई कर रहे हैं, तो सबसे पहले खेत की मिट्टी को समतल बना लें।

 

विशिष्ट वर्णन

1

व्हील की संख्या

2

2

व्हील का व्यास (सेंटीमीटर)

60

3

पंक्ति से पंक्ति की दूरी (सेंटीमीटर)

20

4

प्लास्टिक ड्रम (संख्या)

4

5

ऑपरेशन की औसत गहराई

1-2 सें.मी

6

संचालन की गति (किलोमीटर प्रति घंटा)

1.2

7

वजन (कि.ग्रा.)

8-10

8

दक्षता (%)

70.79

9

लागत (₹)

5700

धान की फसल में खरपतवार से परेशान कृषक को कोनो वीडर कृषि यंत्र का उपाय

धान की खेती काफी मेहनत वाली मानी जाती है। निराई गुड़ाई की प्रक्रिया में काफी मानव श्रम लगता है और कई दिन तक चलने वाली एक प्रक्रिया बन जाती है। लेकिन अब धान की निराई गुड़ाई के लिए कोनो वीडर यंत्र का इस्तेमाल हो रहा है। इससे काम तेजी से और आसानी से पूरा करने में मदद मिल रही है। कोनो वीडर मैन्युअल रूप से संचालित यंत्र है, जो एक मानव आसानी से चला सकता है। यह यंत्र धान के रोपण के 20 से 25 दिनों के बाद निराई गुड़ाई करने के लिए उपयोग किया जाता है। धान की फसल की खड़ी पंक्तियों और स्तम्भों के बीच में खरपतवारों को उखाड़कर मिट्टी में मिला देता है जो किसानों के खेत में हरी खाद का काम करता है, किसानों को खेत में रसायनिक खाद न के बराबर देनी पड़ती है। जिससे उनकी लागत धान के खेत में कम लगती है और उत्पादन अधिक होता है। धान की निराई गुड़ाई 7 से 10 दिनों के अन्तराल पर करते रहना चाहिए। कोनो वीडर में दो कटे हुए रोलर्स एक के पीछे एक लम्बे हैंडल के नीचे फिट किये गए है। शंक्वाकार रोलर्स की परिधि पर दांतेदार ब्लेड होते हैं, सामने के हिस्से में दिया गया एक फ्लोट यूनिट को मिट्टी में डूबने से रोकता है। कोनो वीडर का उपयोग निराई के अलावा हरी खाद की फसल को रौंदने के लिए भी किया जा सकता है। यह ऊपरी मिट्टी को परेशान करता है, और वातन को भी बढ़ाता है। कृषि यंत्र कोनो वीडर को खींचने के लिए एक हत्था भी लगा होता है। जिसे कृषक सरल तरीके से इसे आसानी से खींच सके। उपकरण खड़े मुद्रा में संचालित होता है। इस यंत्र की कार्य क्षमता लगभग 0.18 हेक्टेयर प्रतिदिन है।

कोनो वीडर के गुण

  • धान में निराई-गुड़ाई आसानी से कर सकते हैं।
  • इस यंत्र को महिला भी आसानी से चला सकती है।
  • यह यंत्र खरपतवार को मिट्टी में अच्छी तरह मथ देता है।
  • इस यंत्र की लागत कम है जिसे किसान आसानी से खरीद सकते हैं।
  • किसानों के खेत में खरपतवार को दबा कर जैविक खाद का काम करता है।

 

विशिष्ट वर्णन

शंक्वाकार रोलर्स (संख्या)

व्हील का व्यास (मि. मी.)

गहराई (मि.मी.)

भार (कि.ग्रा.)

लागत (₹)

2

400

55

8-10

1500

ब्रश कटर कृषि यंत्र

हाथ से कटाई करने में श्रम और समय बहुत लगता है। इसमें कृषक का समय व पैसा बहुत बर्बाद होता है। धान की फसल की समय पर कटाई होनी बहुत जरुरी होती है। यदि समय पर धान की पसल की कटाई नहीं की गई तो बहुत नुकसान होता है। आज के समय में खेतों में काम करने वाले मजदूर न मिलने के कारण कृषकों के समक्ष बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी है। ऐसे में समय पर कटाई करना कृषकों के लिए टेढ़ी खीर बन गयी है। इस समस्या को आधुनिक यंत्रों व मशीनों के द्वारा हल किया जा सकता है। पहले व्यापारियों ने धान की फसल कटाई के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें बाजार में उतारी जिन्हें छोटे मध्यम कृषक खरीद नहीं सकते क्योंकि उतनी उनकी आय नहीं होती है लेकिन इस मशीन को छोटे मध्यम कृषक आसानी से ले सकते हैं।

इस यंत्र से केवल धान फसल की कटाई ही नहीं कर सकते हैं बल्कि इससे अनेक प्रकार की फसलों की कटाई भी आसानी से कर सकते हैं। यह यंत्र पेट्रोल और मोबिल आयल से चलने वाली चार स्ट्रोक वाली मोटर से लैस है। इसमें एक हैंडल लगा होता है। हैंडल के आगे कटर लगाने के लिए एक स्थान दिया होता है। इसमेंआप अपने जरुरत के ब्लेड लगाकर अपनी मनचाही फसल काट सकते हैं। इसका भार 7 से 10 किलोग्राम तक होता है।

थ्रेशर, पैडी पेडल संचालित यंत्र का उपयोग

इस थ्रेशर यंत्र को दो कृषक आसानी से चला सकते हैं। अपने पैरों के द्वारा इस यंत्र से एक कृषक धान के बंडल को उठाता है और दूसरा कृषक यंत्र को पैरों के द्वारा चलाता रहता है। जब पहला कृषक यंत्रों के पास खड़ा होता है। धान के बंडल को लेकर तब तक दूसरा कृषक धान के बंडल को उठाता है। पहला कृषक धान के बंडल को इस यंत्र में लगी लकड़ी के एक सिलेंडर पर रखता है, और बंडल को सिलेंडर पर घुमाता रहता है। यंत्र का सिलेंडर घूमता रहता है। इस कारण बीज अलग हो जाता है और डंठल अलग हो जाता है। उन सिलेंडर पर छोरों पर लूप एम्बेडेड/वेल्डेड होते हैं। लूप का उपयोग पौधों के डंठल से बीज निकालने के लिए किया जाता है।

लूप एल्यूनियम का होता है, सिलेंडर पर लगी लूप की ऊँचाई लगभग 40 मि.मी. और 60 मि.मी. होती है। सिलेंडर की चाल लगभग 250 से 300 चक्कर पर मिनट (आरपीएम) होती है। सिलेंडर को पावर ट्रांसमिशन सिस्टम के माध्यम सेपैर पेडल से एक रोटरी गति दी जाती है जिसमें एक बड़ा गेयर और एक छोटा गेयर लगा होता है। बड़े गेयर में दाँतों की संख्या 120 होती है और छोटे गेयर में दातों की संख्या 20 होती है। पैडी पेडल संचालित थ्रेशर यंत्र में फैन भी लगा रहता है। सिलेंडर के नीचे जो धान को साफ करता है फैन की चाल 200 से 220 होता है। फैन थ्रेशर सिलेंडर से चैन के माध्यम से चलता है जो धान में छोटे-छोटे डंठल से अलग भी करता रहता है, कृषकों की समय की बचत करता है। जिससे कृषक को धान को साफ करने के लिए अलग से फैन की जरूरत नहीं होती है, उससे कृषक का समय और लागत बचती है।

यंत्र का संरक्षण

उपयोग से पहले मशीन के सभी नट और बोल्ट को जांचना चाहिए और यदि आवश्यकता हो तो कड़ा कर दिया जाना चाहिए और असर बिंदुओं को बढ़ाना या तेल लगाना चाहिए।

लाभ

थ्रेशर, पैडी पेडल संचालित कृषि यंत्र से कृषक को निम्नलिखित प्रकार के लाभ मिलती हैं:

  • कम शारीरिक श्रम और अधिक दक्षता
  • अनाज को कूटने या पीटने के विपरीत थ्रेशर का उपयोग करने से कम टूटता है।
  • धान को साफ करने की जरुरत नहीं पड़ती है।
  • यह यंत्र हल्का होता है जिसे कृषक खेत खलिहान में लेजा सकते है।
  • इसकी लागत कम आती है जिससे कृषक इसको आसानी से खरीद सकते है।
  • इस यंत्र को महिला कृषक भी आसानी से चला सकती है।
  • इस यंत्र को चलाने के लिए दो कृषकों की जरुरत पड़ती है।

विशिष्ट वर्णन

1.

गियर (संख्या)

2

2.

समग्रमाप, (मि.मी.)

782×643×1.255

3.

सिलेंडरकी चाल

250-300

4.

आरपीएम

200-220

5.

फैन की चाल

98-99

6.

आरपीएम

8-10

7.

सफाई दक्षता (%)

1-1.25

8.

भार (कि.ग्रा.)

14500

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।