
फसल सलाहः उच्च तापमान से गेंहू का बचाव करने के उपाय Publish Date : 07/03/2026
फसल सलाहः उच्च तापमान से गेंहू का बचाव करने के उपाय
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
प्यारे किसान भाईयों, इस बार मार्च के महीने में ही तापमान के तेजी के साथ बढ़ने के चलते गेहूं की फसल पर इस उच्च तापमान का विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है। तापमान के अधिक होने के कारण गेहूं के दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित होती है, इससे दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं और इससे गेहूं के कुल उत्पादन में कमी आ सकती है। बढ़े हुए तापमान से गेहूं की फसल में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आप हमारे कृषि वैज्ञानिक के द्वारा दिए गए निम्नलिखित सुझावों को अपनाकर अपनी फसल के होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं:-
1. पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करनाः

यदि दिन का तापमान 300C से अधिक हो जाता है तो इस गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए 2.0 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (13:00:45) का छिड़काव कर सकते हैं। इस छिड़काव को करने के लिए 2 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट (KNO3) को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से फसल पर छिड़काव करना बेहतर रहता है। गेहूं की पछेती फसल में पोटेशियम नाइट्रेट के दो छिड़काव 10 दिन के अन्तराल पर करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
2. सिंचाई का उचित प्रबन्धनः
वतावरण में व्याप्त उच्च तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए गेहूं की फसल की आवश्यकता के अनुसार हल्की सिंचाई करते रहने से भी बढ़े हुए तापमान का दुष्प्रभाव कम होता है और ऐसा करने से खेत में नमी का स्तर भी उचित बना रहता है। इसके साथ यह भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि तेज हवाओं के चलने के दौरान सिंचाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से फसल के गिरने की सम्भावनाएं काफी अधिक बढ़ जाती हैं।
3. फव्वरा सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए सुझावः
ऐसे तमाम क्षेत्र जहां कि सिंचाई फव्वारे (स्प्रिंकलर) विधि से की जाती है, इन स्थानों पर दोपहर के समय फव्वारा चलाकर खेत के तापमान को कम किया जा सकता है।
अतिरिक्त सलाहः
मंडूसी/कनकी का नियंत्रणः जिन गेहूं के खेतों में मंडूसी/कनकी आदि के पौधे दिखाई दें, इन पौधों को हाथ से उखाड़कर खेत से बाहर कर देना चाहिए, जिससे कि मंडूसी आदि पौधों के बीज बनकर खेत में न गिर सकें और अगले वर्ष मंडूसी का प्रकोप कम रहे।
पीला रतुआ रोग के सम्बन्ध में सलाहः अब किसानों को पीला रतुआ (Yellow Rust) का नियंत्रण करने के लिए फफंूदीनाशक रसायनों का छिड़काव करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जब तापमान 250C से अधिक हो जाता है तो यह रोग स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
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लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
