
उगाएं बेबी कॉर्न, करें भरपूर कमाई Publish Date : 03/03/2026
उगाएं बेबी कॉर्न, करें भरपूर कमाई
प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
बेबी कॉर्न छोटे-बड़े सभी किसानों के लिए एक लाभकारी फसल है। 18 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान हो तो इसकी खेती साल में तीन बार तक कर सकते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। बेबी कॉर्न यानी शिशु मक्का, सामान्य मक्के की अपरिपक्व बालियां होती हैं। इन्हें परागण से पहले ही काट लेते हैं, जब बालियां बहुत छोटी (4-10 सेमी लंबी और 1-2 सेमी मोटी) तथा नरम होती हैं।

इसकी खेती खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में 18-30 डिग्री सेल्सियस तापमान में कर सकते हैं। फरवरी माह में बेबी कॉर्न की बुवाई, संभव है। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर बताते हैं, बेबी कॉर्न की सफल खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, सही बोज किस्म, पौधों के बीच उचित दूरी और समय पर सिंचाई का ध्यान रखना जरूरी है। बाजार में, बेबी कॉर्न की अच्छी कीमत मिलती है और फसल कटाई के बाद बचा हुआ फसल अवशेष पशुओं के लिए हरा चारा के रूप में उपयोगी होता है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ प्राप्त होता है।
20 सेंटीमीटर रखें पौधों के बीच दूरी
बेबी कॉर्न की खेती के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का पीएच 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत की तैयारी में कम से कम दो-तीन बार जुताई करके घास-फूस निकाल लें और बेड या मेड़ तैयार करें। खेत में नमी पर्याप्त होनी चाहिए। यदि मिट्टी सूखी हो, तो बुवाई से पहले सिंचाई करें। पौधों की दूरी 20 सेमी. और कतारों के बीच दूरी 45 सेमी. रखें।
बेहतर किस्मों का करें चुनाव

बेबी कॉर्न की प्रमुख किस्मों में बेबी कॉर्न-1, एचएम-4 और एचएम-5 शामिल हैं। बीज दर 18-25 किग्रा प्रति हेक्टेयर रखें। शुरुआत में खेत में गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें। नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटैशियम की मात्रा 120:60:40 किलो प्रति हेक्टेयर दें। फसल को सही समय पर पोषण देना जरूरी है। पोषक तत्वों की अधिक मात्रा से पत्तियां जल सकती हैं और पौधों का विकास रुक सकता है।
सिंचाई, कीट और रोग प्रबंधन
बेबी कॉर्न की खेती में अंकुरण के बाद नियमित पानी दें। गर्म मौसम में 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। सही समय पर पानी देने से फसल अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है। मुख्य कीट फॉल आर्मी वर्म (सैनिक सुंडी) है। कीट नियंत्रण के लिए लाइट और फेरोमोन ट्रैप लगाएं। नीम ऑयल (3 मिली/लीटर पानी) 20 दिन में छिड़कें। इससे रासायनिक दवाओं की जरूरत कम पड़ेगी।
मार्केट में हैं बड़ी मांग
बेबी कॉर्न की मांग लगातार बढ़ रही है। होटल, रेस्टोरेंट, पिज्जा और स्नैक्स कंपनियां इसे लगातार खरीदती हैं, जिससे किसानों को स्थिर बाजार मिलता है। फ्रोजन और कैनिंग इंडस्ट्री ने इसकी बिक्री को आसान कर दिया है। फसल में बर्बादी बहुत कम होती है। इसकी पत्तियां और कॉब (बाली) चारे व खाद के लिए, सिल्क मशरूम और हर्बल उत्पादों में इस्तेमाल होती है।
45 से 55 दिन में तैयार हो जाती है फसल
बेबी कॉर्न की कटाई का सही समय सिलकिंग स्टेज पर होता है। यह स्टेज तब आती है, जब बाल जैसा सिल्क बाली से बाहर निकलता है। इस समय फसल को तोड़ना चाहिए, यदि ज्यादा देर कर दी जाए तो फसल कड़ी हो 'जाएगी और बाजार मूल्य कम हो जाएगा। फसल लगभग 45-55 दिनों में ताजा उपयोग के लिए तैयार हो जाती है। इस फसल की मांग हर समय बनी रहती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
