
गन्ने की स्वस्थ फसल उगाने के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु Publish Date : 02/03/2026
गन्ने की स्वस्थ फसल उगाने के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
गन्ने की स्वस्थ फसल के लिए 9 Tips टिप्स
1. TILLAGE BY CHISEL PLOUGH / SUB SOILER (गहरी जुताई)
- सब-सोइलर 22 इंच गहराई तक मृदा की कड़ी परत को तोड़ता है।
- मृदा में नमी गहराई तक पहुंचती है, मृदा में हवा का आवागमन (aeration) और जड़ों का फैलाव अधिक क्षेत्र में होने से पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है।
- गहरी जुताई करने से मृदा जनित कीट व रोग एवं खरपतवारों की रोकथाम होती है।
- गन्ने की जड़ें गहराई तक जाने से ज़मीन में पकड़ अच्छी होने से गन्ने गिरने की संम्भावनायें काफ़ी कम हो जातीं हैं।
2. TRICHODERMA APPLICATION (ट्राइकोडर्मा का प्रयोग)
- ट्राइकोडर्मा एक लाभकारी फफूंद (Bio-control agent) है।
- यह लाल सड़न, उकठा एर्व सैट् सड़न जैसे रोगों को रोकता है।
- मृदा की उर्वरता और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता को बढ़ाता है।
- खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 4 किलो ट्राइकोडर्मा FYM/कम्पोस्ट में मिलाकर डालें।
3. TOP PERFORMING VARIETY (क्षेत्र की उत्तम किस्म का चयन करें)

- गन्ना बहुवर्षीय फ़सल है अतः क़िस्म का चुनाव सावधानी पूर्वक करें।
- हमेशा अधिक पैदावार देने वाली और रोग-प्रतिरोधी किस्में लगायें।
- उत्तम किस्म लगाने से ज्यादा पैदावार, अधिक चीनी परता और कीट व रोगों का प्रकोप कम होता है।
4. TOP PORTION FOR SEED (बीज के लिए गन्ने का ऊपर का 1/3 हिस्सा लें)
- 8-10 माह पुराने पौधा गन्ने (plant cane) के ऊपर का एक तिहाई भाग की बुवाई करें। इससे तीव्र अंकुरण एवं पौधा स्वस्थ होता है।
- गन्ने के ऊपरी एक तिहाई भाग कीट व रोगों से कम ग्रसित होता है तथा बीज के लिए सर्वोत्तम होता है।
- इसमें ऑक्सिन हार्मोन अधिक एवं चीनी कम होने के कारण अंकुरण प्रतिशत अधिक एवं तीव्र होता है।
5. THIOPHANATE METHYL (से बीज उपचार)
- 0.1% थायोफेनेट मिथाइल घोल में बीज (सैट्स) को 10-15 मिनट तक डुबोयें।
- इससे लाल सड़न, उकठा और बीज (सैट्) सड़न जैसे रोग नियंत्रित होते हैं।
6. TRENCH METHOD OF SOWING (ट्रेंच विधि से बुवाई)
- गन्ने को 20-25 सेमी गहरे और 120 सेमी दूरी पर नालियों में लगायें।
- इससे जड़ों का बेहतर फैलाव होता है, पौधे गिरते नहीं है, पानी की बचत होती हैं, अधिक ब्यांत एवं पैदावार होती है।
7. TIMELY SOWING (समय पर बुवाई)
- समय पर बुवाई से अंकुरण अच्छा और पौधों की वृद्धि तेज़ होती है।
- देर से बुवाई करने पर खराब अंकुरण, कीट व रोगों का प्रकोप अधिक एवं पैदावार में कमी आती है।
- अपने क्षेत्र के अनुसार उचित समय पर ही बुवाई करें।
8. TRP प्रबंधन (T= टॉप बोरर, R= रेड रॉट, P = पोक्का बोइंग)
- चोटी बेधक (टॉप बोरर): प्रतिरोधी किस्में लगायें और क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC @ 150 मिली / एकड़ 400 लीटर पानी में घोल बनाकर ट्रैन्चिंग करें एवं तुरन्त सिचाई करें।
- लाल सड़न (रेड रॉट): अप्रैल से मई के माह में गन्ने की पत्तियों पर रुद्राक्ष जैसी माला के लक्षण दिखाई देने पर सम्पूर्ण सैट् को जड़ सहित निकालकर नष्ट कर दें और गड्ढे में 5-10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालें उसके बाद अजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डाइफेनोकोनाजोल 11.4% SC @ 200 मिली / एकड़ का 400 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर 2 बार छिड़काव करें।
- पोक्का बोइंग: प्रतिरोधी किस्में लगायें, सैट्स का फफूंदनाशक से उपचार करें और रोग से फसल को सुरक्षित करने के लिए 0.2% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 15 दिन के अंतराल पर 2 बार छिड़काव करें अथवा कसुगामाइसिन 5% + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45% WP @ 400 ग्राम/एकड़ 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
9. TOTAL WEED MANAGEMENT (सम्पूर्ण खरपतवार प्रबंधन)
अंकुरण से पहले (Pre-emergence):
- एट्राजिन 50% WP @ 800 ग्राम / एकड़ या ऑक्सीफ्लोरफेन 23.5% EC @ 300 मिली/एकड़, बुवाई के 3 दिन के भीतर नमी वाली मृदा पर छिड़काव करें।
अंकुरण के बाद (Post-emergence):
- 2,4-D सोडियम साल्ट 44% + मेट्रिब्यूज़िन 35% + पाइराज़ोसल्फ्यूरॉन एथिल 1.0% WDG का मिश्रण @ 1.2 किलोग्राम/एकड़ 400-500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
- मोथा (Cyperusrotundus): हैलोसल्फ्यूरोन मिथाइल 75% WG @ 36 ग्राम/एकड़ 150-200 लीटर पानी में समतल नोजल से छिड़काव करें।
गन्ने की स्वस्थ फसल के लिए 6 Rsटिप्स
1. Right Source (सही स्रोत)
- मृदा व फसल की आवश्यकता अनुसार उर्वरक का चयन करें।
- अम्लीय मृदा में क्षारीय खाद और क्षारीय मृदा में अम्लीय खाद का प्रयोग करें।
- कीटनाशक-फफूंदनाशक हमेशा प्रतिष्ठित कंपनी के ही लें, नकली या एक्सपायर दवा न खरीदें।
2. Right Dose (सही मात्रा)
- खाद की मात्रा फसल की ज़रूरत और मृदा की उर्वरता के अनुसार निर्धारित करें।
- उर्वरक व दवा की मात्रा हमेशा अनुशंसा अनुसार ही प्रयोग करें।
- मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उर्वरको का उपयोग करने से उत्तम परिणाम मिलते हैं।
3. Right Method (प्रयोग का सही तरीका)
- नाइट्रोजन (N) हमेशा पानी देने के बाद ही डालें, जब खेत में हलकी नमी हो और चलते समय मृदा पैर से न चिपके।
- फॉस्फोरस (P2O5) हमेशा बीज (सैट्स) के नीचे बुवाई के समय डालें, कभी भी खेत में छिड़काव न करें।
- पोटाश (K2O) दो बार में प्रयोग करें: 50% बुवाई के समय और 50% बुवाई के 90-100 दिन बाद मिटटी चढ़ाने से पहले प्रयोग करें।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों का बुवाई के समय प्रयोग करें या खड़ी फसल पर स्प्रे करें।
- दवाओं के स्प्रे के लिए कीट के अनुसार सही स्प्रेयर व नोजल एवं प्रयोग विधि का चयन करें।
4. Right Time (सही समय)
- नाइट्रोजन: 20% N बुवाई के समय, 25% N बुवाई के 50-60 दिन बाद, 30% N बुवाई के 90-100 दिन बाद, 25% N बुवाई के 110-120 दिन बाद प्रयोग करें।
- यूरिया का प्रयोग गर्मियों में शाम के समय ही करें।
- धूप में यूरिया के प्रयोग से नाइट्रोजन की गैस बनने के कारण वायुमंडल में उड़ जाती है।
- दवा का छिड़काव हमेशा शाम के समय करें जब हवा न चल रही हो और बारिश 4 घंटे तक होने की संभावना न हो।
5. Right Combination (सही संयोजन)
- दो खाद अथवा दो दवाईयां मिलाने से पहले उनकी अनुकूलता की परख करें जैसे DAP को जिंक सल्फेट, कैल्शियम या मैग्नीशियम के साथ कभी न मिलायें क्योंकि ऐसा करने से सभी तत्व अघुम्नशील पदार्थ में परिवर्तित हो जाएंगे और कोई भी पोषक तत्व फसल को उपलब्ध नही हो पायेगा।
6. Right Water Management (सही जल प्रबंधन)
- खाद का असर मुख्तया जल प्रबंधन पर निर्भर करता है।
- नाइट्रोजन का प्रयोग हमेशा सिंचाई के बाद खेत में पैर टिकने की अवस्था पर करें।
- ड्रिप सिंचाई के साथ नाइट्रोजन का प्रयोग करने से गन्ने में बेहतरीन परिणाम मिलते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
