
जिंक की सही डोज से पाएं बंपर गेहूं Publish Date : 20/02/2026
जिंक की सही डोज से पाएं बंपर गेहूं
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
मिट्टी में एक बार डाला गया जिंक लंबे समय तक असर छोड़ता है। हालांकि, पौधे केवल 5-10 फीसदी जिंक उपयोग कर पाते हैं। धान की फसल के दौरान जिंक का उपयोग किया गया हो, तो गेहूं में दोबारा इसे देने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।गेहूं की अधिक और गुणवत्तापूर्ण उपज पाने के लिए फसल को संतुलित पोषण देना बेहद जरूरी है। लेकिन, किसान अक्सर सूक्ष्म पोषक तत्वों के सही उपयोग को नजरअंदाज कर देते हैं। इन्हीं तत्वों में से एक है जिंक, जिसकी कमी आज देश की करीब 40 फीसदी से अधिक कृषि भूमि में पाई जा रही है। गेहूं के फसल चक्र में लगातार खेती किए जाने से मिट्टी में जिंक की कमी तेजी से हो रही है। यही वजह है कि गेहूं की फसल में जिंक की कमी के लक्षण आमतौर पर देखने को मिलते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिंक का सही समय और सही मात्रा में उपयोग करने से न केवल गेहूं की ग्रोथ बेहतर होती है, बल्कि पौधों का हरापन, मजबूती और कल्लों की संख्या भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
जिंक से मोटे और चमकदार दाने

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के वरिष्ठ प्रसार अधिकारी डॉ. के. एम. सिंह बताते हैं- जिंक पौधों की जड़ों को मजबूत करता है और कल्ले निकलने की प्रक्रिया को तेज करता है। यह दानों को मोटा व चमकदार बनाकर उनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ाता है। जिंक पोषक तत्वों के अवशोषण और एंजाइम निर्माण में भी सहायक है, जो पत्तियों का पीलापन दूर करता है।
लक्षणों की ऐसे करें पहचान
जिंक की कमी होने पर पौधों की ग्रोथ धीमी हो जाती है और पौधे अपेक्षाकृत छोटे रह. जाते हैं। पत्तियों पर नसों के समानांतर पीली धारियां दिखाई देने लगती हैं, जबकि नसें हरी रहती हैं। खेत के कुछ सीमित हिस्सों में ही पौधे कमजोर दिखाई देते हैं, जिससे खेत असमान नजर आने लगता है। यदि समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया। जाए, तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।
सही मात्रा की जानकारी जरूरी
गेहूं की फसल में जिंक का सही उपयोग बहुत जरूरी है। बुआई के समय जिंक सल्फेट 33% की 6 किग्रा या 21% की 10 किग्रा मात्रा प्रति एकड़ पर्याप्त है। 25-30 दिन की अवस्था में जब कल्ले निकलने लगें, तो यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का प्रयोग कर सकते हैं। जिंक सल्फेट 33% की 800 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर या चेल्टेड जिंक 150 ग्राम प्रति एकड़ की दर से सुबह या शाम छिड़काव करें।
ऐसे बढ़ेगी पैदावार

गेहूं की फसल में जिंक की कमी होने के कारण 20 से 30 प्रतिशत तक पैदावार घट सकती है। जिंक की कमी होने पर पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, पौधों की ग्रोथ रुक जाती है, कल्ले कम निकलते हैं और दाने हल्के व पतले रह जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बुआई के समय जिंक डालना सबसे प्रभावी होता है, अन्यथा पहली सिंचाई के समय इसका उपयोग करें।
कम लागत में अच्छी फसल का फॉर्मूला
सही पोषण प्रबंधन से गेहूं की खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। है। गेहूं गेहूं की की बुआई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कितनी कमी है। इसी आधार पर खाद और सूक्ष्म तत्वों का संतुलित प्रयोग करके किसान अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। इससे कम लागत में बेहतर गुणवत्ता वाली अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
