
गन्ने की किस्म सीओ-0118 की खेती करने के लिए कुछ विशेष टिप्स Publish Date : 16/02/2026
गन्ने की किस्म सीओ-0118 की खेती करने के लिए कुछ विशेष टिप्स
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
01- अन्तिम जुताई में 0.5 कि.ग्रा./ट्राइकोडर्मा की दर से प्रयोग करें, इससे विल्ट, रेडरॉट आदि रोग नहीं लगते और मृदा का स्वास्थ्य भी ठीक, रहता है।
02- गन्ने के ऊपरी भाग का 1/3 हिस्सा ही बीज के रूप में प्रयोग करना चाहिए क्योंकि इस भाग में लगभग सभी आनुवांशिक, प्रजातीय गुण मौजूद होते हैं और रोग व कीट से लड़ने की क्षमता भी गन्ने के इस भाग में अधिक होती है।
03- कार्बेण्डाजिम के घोल में गन्ने के टुकडों को आधा घण्टे तक डुबोकर उपचारित करने के बाद ही गन्ने की बुआई करें। जिससे गन्ने के टुकड़ों में शर्करा की मात्रा कम हो जाएगी और जमाव अधिक होगा, साथ में फंगस से लगने वाले रोग जैसे विल्ट, जड़ों का विगलन आदि रोग भी कम लगेंगे।
04- बुआई के समय नाली में बेसल डोज के रूप में 50 कि.ग्रा. यूरिया, 50 कि.ग्रा..डीएपी और 50 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ की दर से डालने के साथ-साथ 100 कि.ग्रा. नीम की खली या सरसों की खली प्रति एकड़ की दर से प्रयोग अवश्य करें इससे जड़ों का विगलन रोग और रूट बोरर नहीं लगता तथा साल भर गन्ने की पत्तियॉ पीली नहीं पड़ती और गन्ना हरा भरा बना रहता है।

05- बुआई करते समय नाली में गन्ने के टुकड़े के ऊपर सिर्फ 05 सेमी.या 02 इंच ऊॅची मिट्टी डालें तथा खेत में पाटा कतई न लगायें, जिससे गन्ने का अधिक जमाव व टिलरिंग अधिक होगी, साथ ही गन्ने का जमाव भी जल्दी होता है।
06- गन्ने की बुआई के 40 से 45 दिन बाद टिलरिंग फेज शुरू होने पर प्रति एकड़ 50 कि.ग्रा. यूरिया और 10 कि.ग्रा. सल्फर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए इससे किल्लों का फुटाव अधिक होता है।
07- 15 अप्रैल से 15 जून के बीच में लगभग 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने के बाद कम से 03 बार खेत की गुड़ाई करना अति आवश्यक है जिससे किल्लों का फुटाव जल्दी और अधिक से अधिक हो सके।
08- गन्ना बुआई के 70 से 80 दिन या 01 जून से 15 जून तक 50 कि.ग्रा. यूरिया और 10 कि.ग्रा. जिंक डालकर लगभग 10 इंच ऊॅची मिट्टी अवश्य चढ़ाना चाहिए, जिससे गन्ने की मोटाई भी अधिक होगी और गन्ना गिरेगा भी नहीं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
