
गन्ना ऊँचाई से काटने पर हो सकते हैं कई नुकसान Publish Date : 10/02/2026
गन्ना ऊँचाई से काटने पर हो सकते हैं कई नुकसान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
1. फुटाव में कमी: गन्ना ऊँचा काटने से फुटाव में कमी आ सकती है, जिससे गन्ने की उत्पादकता कम हो सकती है।
2. गन्ने की गुणवत्ता में कमी: गन्ना ऊँचा काटने से गन्ने की गुणवत्ता में कमी आ सकती है, जिससे चीनी की मात्रा कम हो सकती है।
3. पौधों की मृत्यु: गन्ना ऊँचा काटने से पौधों की मृत्यु हो सकती है, जिससे अगले साल की फसल प्रभावित हो सकती है।
4. मिट्टी की गुणवत्ता में कमी: गन्ना ऊँचा काटने से मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आ सकती है, जिससे भविष्य में फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
5. रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग: गन्ना ऊँचा काटने से रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग करना पड़ सकता है, जिससे मिट्टी और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
6. कीटों और रोगों का हमला: गन्ना ऊँचा काटने से कीटों और रोगों का हमला हो सकता है, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हो सकती है।
7. गन्ने की जड़ों को नुकसान: गन्ना ऊँचा काटने से गन्ने की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे फुटाव में कमी आ सकती है।
इन नुकसानों से बचने के लिए, गन्ना काटने का सही तरीका यह है कि गन्ने को जमीन से लगभग 2-3 इंच ऊपर काटना चाहिए। इससे गन्ने की जड़ें सुरक्षित रहती हैं और फुटाव में कमी नही आती है।
सीओ.0118 की खेती:

01- अन्तिम जुताई में 05kg./ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें जिससे विल्ट, रेडरॉट न लगे और मृदा का स्वास्थ्य भी ठीक, रहे।
02- गन्ने के ऊपरी भाग का 1/3 हिस्सा बीज के रूप में प्रयोग करें क्योंकि इसमें लगभग सभी आनुवांशिक, प्रजातीय गुण मौजूद होते हैं और रोग व कीट से लड़ने की क्षमता भी अधिक होती है।
03- कार्बेण्डाजिम के घोल में गन्ने के टुकडों को आधा घण्टे तक डुबोकर कर रखने के बाद बुआई करें। जिससे गन्ने के टुकड़ों में शर्करा की मात्रा कम हो जाएगी और जमाव अधिक होगा, साथ में फंगस से लगने वाले रोग जैसे विल्ट, जड़ों का विगलन रोग आदि कम लगेगा।
04- बुआई के समय नाली में बेसल डोज के रूप में 50kg यूरिया, 50kg. डीएपी और 50kg. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ की दर से डालने के साथ -साथ-साथ 100kg नीम की खली या सरसों की खली प्रति एकड़ की दर से प्रयोग अवश्य करें जिससे जड़ों का विगलन रोग और रूट बोरर न लगे तथा साल भर गन्ने की पत्तियॉ पीली न पड़े और गन्ना हरा भरा बना रहे।
05- बुआई करते समय नाली में गन्ने के टुकड़े के ऊपर सिर्फ 05 सेमी. या 02 इंच ऊॅची मिट्टी डालें तथा खेत में पाटा कतई न लगायें, जिससे गन्ने का अधिक जमाव व टिलरिंग अधिक हो। साथ में जमाव जल्दी हो।
06-- गन्ने की बुआई के 40 से 45 दिन बाद टिलरिंग फेज शुरू होने पर प्रति एकड़ 50kg यूरिया और 10kg. सल्फर का प्रयोग अवश्य जिससे किल्लों का फुटाव अधिक हो।
07- 15 अप्रैल से 15 जून के बीच में लगभग 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने के बाद कम से 03 बार खेत की गुड़ाई करना अति आवश्यक है जिससे किल्लों का फुटाव जल्दी और अधिक से अधिक हो।
08- गन्ना बुआई के 70 से 80 दिन या 01 जून से 15 जून तक 50 kg.यूरिया और 10kg जिंक डालकर लगभग 10 इंच ऊॅची मिट्टी अवश्य चढ़ाना चाहिए, जिससे गन्ने की मोटाई भी अधिक होगी और गन्ना गिरेगा भी नहीं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
