गन्ने संग आलू और उड़द की अनूठी जुगलबंदी      Publish Date : 05/02/2026

            गन्ने संग आलू और उड़द की अनूठी जुगलबंदी

                                                                                                          प्रोफेसर आर. एस. सेगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा

जनपद मेरठ के भटीपुर गांव के किसान रतनपाल सिंह गन्ने फसल के साथ आलू और उड़द की सहफसली खेती करते हैं। मशीनों के उपयोग से वह कम खर्च में बेहतर उपज और अधिक मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं। वह गन्ने के साथ आलू और उड़द की सहफसली खेती करते हैं, जिससे छह महीने में तीन फसलें मिलती हैं।

आलू और उड़द से खेती की लागत निकल जाती है, जबकि गन्ना शुद्ध मुनाफा देता है। आधुनिक मशीनों (ट्रेचर, टिलर, रेटून मैनेजर) के उपयोग से समय और खर्च में भी बचत होती है। अपनी सफलता से ही उन्होंने मुनाफे के 10 लाख रुपये से कृषि यंत्र खरीदे हैं।

कम हुई लागत, बढ़ा मुनाफा

                                                  

रतनपाल सिंह ने को-13235, को-16202 और को-18231 जैसी गन्ने की उन्नत किस्में अपनाई हैं। सिंगल ट्रेंच विधि, सिंगल आई तकनीक और बिना बंधाई की खेती से प्रति एकड़ 400-450 क्विंटल गन्ना उत्पादन हो रहा है। यह बताते हैं, बिना बंधाई के गन्ने में कीट और रोग का प्रकोप कम होता है। गन्ने को गिरने से बचाने के लिए रतनपाल खेत में मिट्टी चढ़ाते हैं और पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखते हैं।

रतनपाल सिंह ने बताया कि गन्ने के साथ आलु, उड़द, प्याज और हरी मिर्च जैसी फसलें लगाकर लागत कम कर सकते हैं और मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है।

किसानों के लिए बने प्रेरणा

रतनपाल सिंह कहते हैं, सही तकनीक, सहफसली खेती व आधुनिक मशीनों के प्रयोग से गन्ने की खेती में खर्च में बचत, उत्पादन वृद्धि और शुद्ध मुनाफा सुनिश्चित कर सकते हैं। खेती का यह तरीका अन्य किसान भी आसानी से अपना सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।