ट्रेन्च विधि से बुवाई वाले गन्ने का सिंचाई प्रबंधन      Publish Date : 03/02/2026

      ट्रेन्च विधि से बुवाई वाले गन्ने का सिंचाई प्रबंधन          

                                                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

ट्रेन्च (नाली) विधि से गन्ने की सिंचाई केवल नालियों (trenches) में की जाती है, जिससे पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग 50−60% पानी की बचत होती है और जल प्रबंधन बेहतर होता है। इस विधि में बुआई के बाद पहली सिंचाई 45-60 दिनों के भीतर करें। मिट्टी में नमी के आधार पर ही अगली सिंचाई करें और पानी की खपत को नियंत्रित रखने के लिए मिट्टी चढ़ाते समय जल निकासी का ध्यान रखें। 

ट्रेन्च विधि से गन्ने की सिंचाई के प्रमुख बिंदु:

  • प्रथम सिंचाई: गन्ने की बोवाई के लगभग 45-60 दिनों के बाद, जब पौधे जम जाएं और नमी कम होने लगे, तब पहली सिंचाई करें।
  • सिंचाई की विधि: पानी केवल ट्रेंच (नालियों) में छोड़ें, पूरे खेत में नहीं। इससे गन्ने की जड़ों को सही मात्रा में नमी मिलती है।
  • सिंचाई की आवृत्ति: मिट्टी में नमी के आधार पर, शरदकालीन गन्ने में 6-7 और वसंतकालीन गन्ने में 4-5 सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी चढ़ाना (Earthing up): पहली सिंचाई के बाद, खरपतवार निकालने के साथ-साथ मिट्टी चढ़ाने (Nirai-gudai) का काम बहुत जरूरी है।
  • जल निकासी: जलभराव से बचें। यदि भारी वर्षा हो तो नालियों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें, अन्यथा जड़े सड़ सकती हैं।
  • पानी की बचत: चूँकि केवल 4-5 फीट पर बनी पंक्तियों के बीच सिंचाई की जाती है, इसलिए पानी बर्बाद नहीं होता है। 
  • यह विधि गन्ने को गिरने से भी बचाती है और प्रति हेक्टेयर 1000-1500 क्विंटल तक उपज (yield) देने में मदद करती है। 

ट्रेन्च की गहराई और चौड़ाई

                                                 

  • ट्रेन्च की गहराई: ट्रेन्च की गहराई 20-25 सेमी होनी चाहिए।
  • ट्रेन्च की चौड़ाई: ट्रेन्च की चौड़ाई 30-40 सेमी होनी चाहिए।

सिंचाई के तरीके

  • फ्लड सिंचाई: फ्लड सिंचाई में पानी को ट्रेन्च में भर दिया जाता है और पानी को गन्ने की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।
  • ड्रिप सिंचाई: ड्रिप सिंचाई में पानी को ड्रिप के माध्यम से गन्ने की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

सिंचाई के समय

  • गन्ने की फसल की उम्र: गन्ने की फसल की उम्र के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। आमतौर पर गन्ने की फसल को 10-15 दिनों में एक बार सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी की नमी: मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। यदि मिट्टी सूखी है, तो सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • मौसम: मौसम के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। यदि मौसम गर्म और शुष्क है, तो सिंचाई की आवश्यकता होती है।

सिंचाई की मात्रा

  • गन्ने की फसल की उम्र: गन्ने की फसल की उम्र के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। आमतौर पर गन्ने की फसल को 10-15 सेमी पानी की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी की नमी: मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। यदि मिट्टी सूखी है, तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
  • मौसम: मौसम के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। यदि मौसम गर्म और शुष्क है, तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।