गन्ने को फूलने से रोकने की तकनीक      Publish Date : 31/01/2026

                 गन्ने को फूलने से रोकने की तकनीक

                                                                                                                            प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

किसानों को यह तो बहुत पहले से विश्वास है कि गन्ने की फसल में फूल का आना अच्छा नहीं होता है, यद्यपि इससे होने वाली हानियों से वे अभी तक अच्छी तरह परिचित नही हैं। अधिक उपज देने वाली गन्ने को किस्में प्रायः फूल जाती हैं। भारत के दक्षिणी भागों (उष्णकटिबन्धीय) में उत्तरी भागों (उपोष्ण कटिबन्धीय) की अपेक्षा गन्ना बहुत अधिक फूलता है। यह उन किसानों के लिए एक समस्या है जो अपनी फसल फूलने के 1-4 माह बाद काटना चाहते हैं। दक्षिण भारत में अक्तूबर-नवम्बर के महीन में ही पूरे गन्ने का खेत का खेत फूला दिखाई देता है। दिसम्बर और जनवरी में गन्न के सिर पर केवल फूल का सूखा डण्डल लकड़ी जैसा दिखाई देता है।

उत्तरी भारत में विशेष रूप से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गन्ने की कुछ किस्मो में फूल दिसम्बर-जनवरी में दिखाई देते हैं और फूल का सूखना फरवरी से शुरू हो जाता है। फूल थाने के बाद नयी पत्तियों तथा तनों का बनना बिल्कुल रुक जाता है तथा गन्ने का पोर खोखला हो जाता है। यह गन्ने के पोर से शुरू होकर नीचे की तरफ फैलता है। यह कुछ गन्ने की किस्मों में दूसरी किन्मों की अपेक्षा अधिक होता है। अन्त में गन्ने की ऊपर की आँखें जमने लगती है, बढ़ जाती है। अगर इन किस्मों में फूल का आना रोक दिया जाय तो इसका उगाना वर्तमान खेती के लिए अधिक लाभदायक हो जायेगा।

गन्ने में फूल क्यों, कैसे और कब आता है

                                                                 

गन्ने को फूलने से रोकने के पहले यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि इसमें फूल क्यों, कैसे और कब आता है। जैसा कि मालूम है कि बहुत से गन्ने के फूलने का एक विशेष समय होता है जिसके अन्दर वे फूलते हैं। फूल का आना बहुत सी बातों पर निर्भर करता है। जिसमें रात और दिन को लम्बाई प्रधान है। इसके अलावा तापमान और भूमि की नमी का इस पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

यह देखा गया है कि साधारणतः लगभग साढ़े ग्यारह घन्टे की रात फूल आने के लिए जरूरी है। लम्बी रातें ही फूल बनने के लिए अनुकूल होती हैं। पूरे वर्ष के अन्दर जब भी रातें लगभग इतने घन्टे की होती हैं तो फूल बनने के अन्य कारकों Factors) के अनुकूल होने पर फूल का आना शुरू हो जाता है। लखनऊ में फूल बनने की शुरुआत (Floral indication) के समय रातें लगभग 12 घन्टे की होतो हैं जबकि कोयम्बटूर में यह लगभग 11.25 घन्टे की पाई गयी है। ऐसा केवल दोनों स्थानों के तापमान के अन्तर के कारण हो सकता है।

गन्ने में फूल आने की शुरुआत (Floral indication) किसी विशेष रात या दिन की लम्बाई आने पर ही होती है जब पौधे की नमी, वायु तथा तापमान फूल आने के लिए अनुकूल हो। ऐसे समय में गन्ने की विशेष कर ऊपर की पत्तियां सूर्य की रोशनी द्वारा हारमोन बनाती है। यह औसत तापमान और भूमि की नमी की उपस्थिति में पत्ती द्वारा गन्ने के तने के अन्तिम ऊपरी सिरे पर पहुंचता है। हारमोन बनने और फूल के आने की शुरुआत के बीच का समय कुछ ही दिनों का होता है जिसमें गन्ने की किस्मों और जलवायु के अनुसार अन्तर होता रहता है। इसको उपस्थिति में फल का बनना शुरू हो जाता है।

नयी पत्ती और पोर (Internode) का बनना बिल्कुल रुक जाता है। फल बनने की शुरुआत पूरे भारत में एक समय पर नहीं होती है क्योंकि साढ़े ग्यारह घन्टे की रात या किसी विशेष दिन या रात की लम्बाई को फल आने के अनुकूल होतो है, सभी स्थानों में एक समय पर नहीं होती है। 21 जून से 21 दिसम्बर की ओर आने में दिन छोटा और रात बड़ो होती है। ठीक इसके विपरीत 21 दिसम्बर से 21 जून की ओर जाने से होता है 21 जून को उत्तरी ध्रुव पर 24 घन्टे का निपवन रेखा पर 12 घन्टे का और दक्षिणी ध्रुब पर 0 घन्टे का दिन होता है। इन दिनों के बीच के समय में दिन को लम्बाई उत्तरी ध्रुब से दक्षिणी ध्रुव को तरफ पटती जाती है।

                                                           

इसके ठीक विपरीत दिसम्बर 21 को होता है। जबसि रात उत्तरी ध्रुव पर 24 घन्टे की ओर दक्षिणी ध्रुव पर घटते हुए 0: घन्टे को हो जाती है। पृथ्वी पर सभी जगह य केल सितम्बर 21 और मार्च 21 को दिन व रात बराबर होता है। इसके अलावा किसी भी समय दिन और रात की लम्बाई भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होतो है। यही कारण है कि लखनऊ (अक्षांश 26°) में फूल आने की शुरुआत अधिकांश गन्ने की किस्मों में सितम्बर के तीसरे और चौथे हफ्ते में होती है जबकि जिला बीजापुर (अक्षांश 16°), मैसूर राज्य में यह अगस्त के लगभग अन्तिम और सितम्बर के पहले हफ्ते में तथा कोयम्बटूर (अक्षांश 110) में जुलाई के अन्तिम हफ्ते से अगस्त के दूसरे हफ्ते तक होता हैं। फूल बनने के दिन से इसके ऊपर निकल कर दिखाई देने के समय तक साधारणता लगभग 60-100 दिन तक लग जाते हैं। यह गन्ने की किस्मों तथा जलवायु पर निर्भर करता है। अगर गन्ने में फूल आने की शुरुआत का दिन एक स्थान पर मालूम हो जाये तो भारत के किसी भी भाग में फूल के आने का दिन मालूम किया जा सकता है।

ऐसा है कि विषवत रेखा से दूर जाने पर प्रति एक अंश अक्षांश के अन्तर पर लगभग 2-4 दिन की फूल लगने में देरी हो जाती है। यद्यपि गन्ने की किस्म, स्थान और जलवायु के कारण इसमें थोड़ा अन्तर पड़ सकता है।

विषुवत रेखा से नजदीक के स्थानों में गन्ने के फूलने का समय काफी लम्बा होता हैं और ज्यो-ज्यों दूर होते जाते हैं, यह कम होता जाता है। क्योंकि विषुवत रेखा के पास रात और दिन का समय, जो फूलने के अनुकूल होता है, कांफी दिनों तक एक सा रहता है। जबकि दूर होने पर घटता बढ़ता है। दक्षिण भारत में पहले तथा अधिक फूल बाने का कारण विषुवत रेखा के पास तथा जलवायु का अनुकूल होना है।

पोधों को फूलने के जिये एक औसत बानस्पतिक वृद्धि की जरूरत होती है जिसकी प्राप्ति निश्चित अवस्था में होती है। गन्ने की किस्मों के अनुसार इसमें थोड़ा बहुत अन्तर हा सकता है। यही कारण है कि जनवरी से मई के शुद्ध तक बोया गन्ना अक्तूबर व नवम्बर में फूल जाता है यद्यपि बाद में बोये हुये गश्ने को फसल में फूल निकलने का प्रतिशत पहले बोये हुये गन्ने की अपेक्षा कम होता है जो व्यांत की मात्रा और उसकी उम्र पर निर्भर करता है। जबकि जून और उसके बाद के माह में बोये गन्ने, आने वाले अक्तूबर-नवम्बर में न फूलकर दूसरे वर्ष के अक्तूबर-नवम्बर में फूलते हैं। क्योंकि उम्र कम होने के कारण फूल बनने के शुरू के दिनों का पौधा सूर्य की रोशनी द्वारा फूल बनाने वाला हारमोन नहीं बना पाता, जिससे गन्ना नहीं फूलता है और फिर दूसरे वर्ष का फूल बनने वाले समय में ही फूलता है।

उपरोक्त बातों के ज्ञान होने पर गन्ने की फसल को फूलने से रोका जा सकता है। उन दिनों जब फूल बनने के लिये पत्तियाँ सूर्य की रोशनी द्वारा हॉरमोन बनाती है, निम्नलिखित विधियों में से एक विधि द्वारा फूल का आना रोका जा सकता है।

  1. उन दिनों ऊपरी पत्तियों को जो फूल बनने के लिये हारमोन वनाती हैं, काट दिया जाय।
  2. उन दिनों ऊपरी पत्तियों पर ऐसा रासायनिक पदार्थ छिड़का जाय कि वे सूख जायें और फूल बनाने वाला हारमोन न बन पाये।
  3. उन दिनों गन्ने के खेत की सिचाई नहीं करना चाहिये|
  4. उन दिनों रात को कुछ समय के लिए खेत में पौधों को रोशनी दी जाय।
  5. गम्ने की अवसाली (जुलाई, अगस्त और सितम्बर) बुवाई करना। (ऊष्ण कटिबन्धीय भागों में)।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।