ट्रैन्च वाले गन्ने की सिंचाई करने की विधि      Publish Date : 01/02/2026

             ट्रैन्च वाले गन्ने की सिंचाई करने की विधि

                                                                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

  • ट्रेन्च वाले गन्ने की सिंचाई करने के लिए कुछ सुझाव यहाँ दिए गए हैं:-

ट्रेन्च की गहराई और चौड़ाई

1. ट्रेन्च की गहराई: ट्रेन्च की गहराई 20-25 सेमी होनी चाहिए।

2. ट्रेन्च की चौड़ाई: ट्रेन्च की चौड़ाई 30-40 सेमी होनी चाहिए।

सिंचाई के तरीके

1. फ्लड सिंचाई: फ्लड सिंचाई में पानी को ट्रेन्च में भर दिया जाता है और गन्ने की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

2. ड्रिप सिंचाई: ड्रिप सिंचाई में पानी को ड्रिप के माध्यम से गन्ने की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

सिंचाई के समय

                                                        

1. गन्ने की फसल की उम्र: गन्ने की फसल की उम्र के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। आमतौर पर गन्ने की फसल को 10-15 दिनों में एक बार सिंचाई की आवश्यकता होती है।

2. मिट्टी की नमी: मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। यदि मिट्टी सूखी है, तो सिंचाई की आवश्यकता होती है।

3. मौसम: मौसम के अनुसार सिंचाई की जानी चाहिए। यदि मौसम गर्म और शुष्क है, तो सिंचाई की आवश्यकता होती है।

सिंचाई की मात्रा

1. गन्ने की फसल की उम्र: गन्ने की फसल की उम्र के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। आमतौर पर गन्ने की फसल को 10-15 सेमी पानी की आवश्यकता होती है।

2. मिट्टी की नमी: मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। यदि मिट्टी सूखी है, तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

3. मौसम: मौसम के अनुसार सिंचाई की मात्रा तय की जानी चाहिए। यदि मौसम गर्म और शुष्क है, तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

गन्ने की ट्रान्स प्लान्ट (गन्ने की ट्रांसप्लांटिंग) करने से कई फायदे होते हैं:

उत्पादन में वृद्धि

1. उत्पादन में वृद्धि: ट्रान्स प्लान्ट करने से गन्ने की उत्पादन में वृद्धि होती है, क्योंकि पौधे की जड़ें पहले से ही विकसित होती हैं।

2. फसल की गुणवत्ता में सुधार: ट्रान्स प्लान्ट करने से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है, क्योंकि पौधे को अधिक पोषक तत्व मिलते हैं।

समय और श्रम की बचत

1. समय की बचत: ट्रान्स प्लान्ट करने से समय की बचत होती है, क्योंकि पौधे को पहले से ही विकसित किया जा चुका होता है।

2. श्रम की बचत: ट्रान्स प्लान्ट करने से श्रम की बचत होती है, क्योंकि पौधे को पहले से ही विकसित किया जा चुका होता है।

अन्य फायदे

                                                          

1. फसल की सुरक्षा: ट्रान्स प्लान्ट करने से फसल की सुरक्षा होती है, क्योंकि पौधे को पहले से ही विकसित किया जा चुका होता है।

2. मिट्टी की सुरक्षा: ट्रान्स प्लान्ट करने से मिट्टी की सुरक्षा होती है, क्योंकि पौधे की जड़ें मिट्टी को स्थिर रखती हैं।

3. पानी की बचत: ट्रान्स प्लान्ट करने से पानी की बचत होती है, क्योंकि पौधे को पहले से ही विकसित किया जा चुका होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।