
टिकाऊ खेती के लिए अपनाएं ये तीन मंत्र Publish Date : 16/01/2026
टिकाऊ खेती के लिए अपनाएं ये तीन मंत्र
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
शून्य जुताई, फसल चक्र और ड्रिप सिंचाई टिकाऊ खेती के वह तीन मंत्र हैं, जो कम खर्च में अधिक उत्पादन प्रदान कर सकते हैं। छह साल के अध्ययन में खेती के छह तरीकों की तुलना के बाद केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान और भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। पारंपरिक जुताई की तुलना शून्य-जुताई, रोपाई की तुलना सीधी बुवाई, चावल-गेहूं की खेती की तुलना मक्का-गेहूं-मूंग के फसल चक्र से की गई है। इस दौरान पारंपरिक व ड्रिप सिंचाई का भी अध्ययन किया गया। सबसे अच्छे परिणाम शून्य-जुताई और मक्का, गेहूं, मूंग के फसल चक्र से मिले हैं, जिनकी ड्रिप सिंचाई की गई थी। यह तरीका 22.2 प्रतिशत अधिक चावल समतुल्य उपज और कुल 35.6 प्रतिशत अधिक उत्पादन देता है।

शून्य जुताई, फसल चक्र और ड्रिप सिंचाई: टिकाऊ कम खर्च में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अपनाएं यह तीन मंत्र-
शून्य जुताई, फसल चक्र और ड्रिप सिंचाई टिकाऊ खेती के वो तीन मंत्र हैं, जो कम खर्च में अधिक उत्पादन दिला सकते हैं। छह साल के अध्ययन में खेती के छह तरीकों की तुलना के बाद केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान और भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
टिकाऊ खेती के लिए अपनाएं ये तीन मंत्र -
खेती को लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने किसानों को तीन खास मंत्र अपनाने की सलाह दी है, शून्य जुताई, फसल चक्र और ड्रिप सिंचाई। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान और भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के छह साल लंबे अध्ययन में खेती की पारंपरिक पद्धतियों की तुलना आधुनिक टिकाऊ तकनीकों से की गई।
शोध के परिणाम
इस अध्ययन में पारंपरिक जुताई की तुलना शून्य-जुताई, रोपाई की तुलना सीधी बुवाई, और चावल-गेहूं की तुलना मक्का-गेहूं-मूंग के फसल चक्र से की गई। साथ ही, पारंपरिक सिंचाई बनाम ड्रिप सिंचाई के परिणाम भी देखे गए। निष्कर्ष यह निकला कि शून्य-जुताई और मक्का-गेहूं-मूंग के फसल चक्र, जब ड्रिप सिंचाई के साथ अपनाए गए, तो 22.2 प्रतिशत अधिक चावल समतुल्य उपज और कुल 35.6 प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ।
शून्य जुताई का लाभ
- खेत की जुताई न करने से खर्च कम होता है।
- मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य लंबे समय तक बरकरार रहती है।
- फसल अवशेष खेत में छोड़ने से नमी बनी रहती है।
- खरपतवार स्वतः नियंत्रित हो जाते हैं।
ड्रिप सिंचाई और उचित फसल चक्र का महत्वः
ड्रिप सिंचाई से पानी की खपत 85 प्रतिशत तक कम हो जाती है। फसल चक्र अपनाने से मिट्टी के पोषक तत्व संतुलित रहते हैं और एक ही फसल को बार-बार उगाने से होने वाली समस्याएं दूर होती हैं। मक्का-गेहूं-मूंग जैसे विविध फसल चक्र से किसानों को अधिक पैदावार और बेहतर आय मिलती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
