
गेहूं और आलू की फसल पर पाले का प्रभाव Publish Date : 31/12/2025
गेहूं और आलू की फसल पर पाले का प्रभाव
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
अधिक सर्दी होने के कारण आलू की फसल में पाला पड़ जाने से काफी नुकसान होता है और फसल का उत्पादन गिर सकता है। वहीं दूसरी ओर गेहूं की फसल के लिए कम तापमान की आवश्यकता होती है और जो वर्तमान में तापमान चल रहा है यह गेहूं की फसल के उत्पादन के लिए बहुत अधिक अनुकूल रहता है, क्योंकि कम तापमान पर गेहूं की मेटाबॉलिक क्रियाएं अच्छे प्रकार से होती हैं और जिसका उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
लेकिन यदि लंबे समय तक धूप नहीं निकलेगी तो गेहूं की फसल भी प्रकाश संश्लेषण की क्रिया समुचित रूप से न हो पाने के कारण भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लेकिन आलू की फसल में लगातार यदि इसी तरह का मौसम बना रहेगा तो निश्चित रूप से आलू की फसल पाल के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।

इस समय तापमान में लगातार गिरावट हो रही है जिसके चलते आलू की फसल कुप्रभावित हो सकती है। ऐसे में जिस दिन पाला पड़ने की संभावना हो तो पाले से आलू की फसल को बचाने के लिए यह जरूरी है कि शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई अवश्य कर दें। जब खेत में सिंचाई रहेगी तो खेत के चारों तरफ का वातावरण गर्म रहेगा और कोशिका के अंदर पानी जाने से कोशिका जल जाम नहीं पाएगा और कोशिकाएं फटने से बच जाएगी।
क्योंकि जब कोशिका में जल जमता है तो उसे कोशिका का आयतन बढ़ जाता है जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं और पत्तियां मुरझा कर लटक जाती है और धीरे-धीरे सूख जाती हैं। इसलिए फसल को पाले से बचाने के लिए फसल की एक हल्की सिंचाई अवश्य करें जिससे आलू की फसल की पाले से रक्षा की जा सके।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
