
सरसों की फसल को पाला, रोग और कीट आदि से सुरक्षित के रखने के उपाय Publish Date : 23/12/2025
सरसों की फसल को पाला, रोग और कीट आदि से सुरक्षित के रखने के उपाय
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
सरसों में पाला, रोग और कीट प्रबंधन कैसे करें?
सरसों की फसल को सुरक्षित रखने बेहतरीन उपायः
किसान भाईयों आपकी सरसों की फसल को पाले का प्रकोप भारी नुकसान पहुंचा सकता है। दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में पाले से पौधों की ऊपरी वृद्धि काफी प्रभावित होती है, जिससे उसकी द्वितीयक शाखाएं निकलती हैं और दाने आकार में छोटे रह जाते हैं। पाले से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय पाले के समय पर फसल की सिंचाई करना होता है। इसके अतिरिक्त फसल में सल्फर युक्त यौगिक, थायोयूरिया और कुछ फफूंदनाशकों का छिड़काव करने से पौधों की सहनशीलता पाले के प्रति बढ़ जाती है।
सरसों के सम्बन्ध में यदि हम रोग प्रबंधन की बात करें तो सफेद रोली, तना गलन और अल्टरनेरिया झुलसा आदि इसके प्रमुख रोग होते हैं। सफेद रोली रोग की रोकथाम के लिए 10 से 25 अक्टूबर के बीच बुवाई और बीज उपचार करना आवश्यक है। फसल पर रोग के लक्षण दिखाई देने पर रिडोमिल एमजेड का छिड़काव करना प्रभावी पाया गया है। तना गलन रोग के प्रबन्ध के लिए फसल पर 25-30 प्रतिशत फूल आने पर बेनोमाइल या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव किया जा सकता है।

इसी प्रकार कीटों में माहू (चेपा) सरसों की सबसे गंभीर समस्या है, विशेष रूप से देर से बोई गई फसलों में। फूलों और फलियों पर इसका प्रकोप तेल की मात्रा को भी कम कर देता है। यदि 10 पौधों में से एक पौधे पर माहू दिखाई दे या एक पुष्प गुच्छे में 20-30 माहू हों, तो ऑक्सीडीमेटोन मिथाइल या डाइमेथोएट का छिड़काव कर कीट का प्रबन्ध करना चाहिए। यह छिड़काव दोपहर बाद करना जरूरी है, जिससे कि खेत में मौजूद मधुमक्खियों को हानि न पहुंचने पाए।
सही समय पर किए गए कृषि कार्य, संतुलित पोषण और समुचित रोग एंव कीट प्रबंधन से सरसों की फसल न केवल सुरक्षित रहती है, बल्कि बेहतर उपज और इससे फसल की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
