गेहूं व जौ की फसल में खरपतवार नियंत्रण      Publish Date : 12/12/2025

                 गेहूं व जौ की फसल में खरपतवार नियंत्रण

                                                                                                                                                            प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गेहूं व जौ सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें हैं इन फसलों की अधिक उपज लेने में खरपतवार एक मुख्य बाधक कारक है जो कि उपज में करीबन 15-30 प्रतिशत तक कमी कर देता है। विभिन्न क्षेत्रों में खरपतवारों की समस्या भूमि एवं जलवायु की विभिन्नता के कारण अलग-अलग होती है। फसल की किरूम, फसल पद्धति एवं शस्यतकनीकी के आधार पर भी खरपतवारों की समस्या अलग होती है। गेहूं की बौनी किस्मों के विकास के साथ-साथ फसल में खरपतवारों की समस्या भी अधिक हुई है क्योकि इन किस्मों में अधिक मात्रा में उर्वरक व अधिक सिंचाइयों का प्रयोग होता है।

खरपतवार, फसल की उपज में कमी करने के साथ-साथ जमीन से 30-40 किलो नत्रजन, 10-15 किलो फास्फोरस तथा 20-40 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर लेकर जमीन की उर्वराशक्ति कम करते हैं।

शस्य व यांत्रिक विधि:- इन फसलों में एक निराई-गुड़ाई बुवाई के 25-30 दिन बाद करके खरपतवार निकाल देवें तथा आवश्यकतानुसार दूसरी निराई-गुड़ाई बुवाई के 45-50 दिन बाद करें। इन फसलों की बुवाई क्रोस विधि (22.5 सेमी. X 22.5 सेमी.) से करने से खरपतवारों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फसलों की बुवाई देरी से करने पर भी खरपतवार कम आते हैं लेकिन पैदावार में काफी गिरावट हो जाती है।

रासायनिक विधि:- चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए बोनी किस्मों में बुवाई के 30-35 दिन व अन्य किस्मों में 40-45 दिन के बीच आधा किलो 2-4 डी एस्टर साल्ट या पौन किलो 2-4 डी अमाइन साल्ट सक्रिय तत्व नींदानाशी रसायन प्रति हेक्टेयर की दर से 500-700 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। गुल्ली-डण्डा व जंगली जई खरपतवारों का प्रकोप जिन खेतों में गत वर्षों में अधिक रहा हो उनमें फसल की बुवाई के 30-35 दिन बाद आइसोप्रोट्यूरान अथवा मेटाक्सिरोन नींदानाशी हल्की मिट्टी में पौन किलो तथा भारी मिट्टी में सवा किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 500-700 लीटर पानी में घोल बनाकर एकसार छिड़काव करें। मैटाक्सिरोन के छिड़काव करने से घास कुल व चौड़ी पत्ती वाले सभी खरपतवार समूल नष्ट हो जाएंगे। इन खरपतवारों के मामूली प्रकोप वाले खेतों में जब खरपतवार बड़े हो जाएं तब उनको बीज बनने से पहले खेत से निकाल दे तथा उनको नष्ट कर दे।

                                                                                   

खरपतवार नियंत्रण हेतु 250 ग्राम 2-4 डी एस्टर आधा किलो आइसोप्रोट्यूरान सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर 600-800 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवाई के 30-35 दिन बाद छिड़काव करें। जहां जंगली पालक खरपतवार का प्रकोप हो उन खेतों में बुवाई के 30-35 दिन बाद आइसोप्रोट्यूरान 750 ग्राम तथा 2, 4 डी 400 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर को 500-700 लीटर पानी में घोल बनाकर एक सार छिड़काव करें। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु पौन किलो पैन्डीमिथालिन प्रति हैक्टेयर की दर से 500-700 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवाई के तुरन्त बाद किन्तु उगने से पहले छिड़काव करें।

प्याजी की अधिकता वाले खेतों में खरपतवार नियंत्रण हेतु नवंबर के प्रारंभ में भारी पलेवा करके खरपतवार उग आने पर जुताई द्वारा नष्ट कर देवें तथा खड़ी फसल में 30-35 दिन की अवस्था पर पौन किलो 2, 4 डी प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। जहां जवासा खरपतवार की समस्या हो वहां गेहूं व जौ की कटाई के बाद ग्लाइफोसेट नींदानाशी का 0.3 प्रतिशत का घोल बनाकर एक माह के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें। खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि छिड़काव एक सार होना चाहिए तथा हमेशा फ्लेट फेन नोजल का प्रयोग करना चाहिए। तेज हवा चल रही हो तब छिड़काव नहीं करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।