लहसुन की खेती वैज्ञानिक विधि से      Publish Date : 01/12/2025

                        लहसुन की खेती वैज्ञानिक विधि से

                                                                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

उपयुक्त जलवायु:

लहसुन ठंडी और शुष्क जलवायु की फसल है।

अंकुरण तापमान: 15–20°C

वृद्धि हेतु तापमान: 20–25°C

अधिक तापमान (30°C+) पर गाठें छोटी बनती हैं।

मिट्टी एवं खेत की तैयारी:

दोमट और बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त।

pH: 6.0–7.0

पानी का निकास बहुत अच्छा होना चाहिए।

1 गहरी जुताई + 2–3 हल्की जुताई कर भुरभुरा खेत बनाएं।

प्रति हेक्टेयर 15–20 टन गोबर खाद डालें।

बीज एवं किस्में:

लहसुन की उन्नत किस्में:

                                                                        

यमुनाजी-1, यमुनाजी-2, एग्रीफाउंड व्हाइट, एग्रीफाउंड पार्वती, G-41 आदि बड़ी कलियों वाली किस्में बाजार में उच्च मूल्य देती हैं।

बीज का चयन:

बीज पूरी तरह पका, स्वस्थ और बड़ा होना चाहिए।

कली (Clove) का वजन 4–6 ग्राम होना चाहिए क्योंकि बहुत छोटी कलियाँ उपज कम देती है।

बीज उपचार:

  • 2% नमक घोल में कलियों को डालकर खराब/बीमार कलियाँ हटाएँ।
  • ट्राइकोडर्मा या बाविस्टिन 2–3 ग्राम/किग्रा बीज से उपचार करें।

बुवाई का समय:

उत्तर भारत: 15 अक्टूबर – 30 नवम्बर तक।

मध्य भारत: अक्टूबर – नवम्बर तक।

दक्षिण एवं पहाड़ी क्षेत्र: सितंबर – अक्टूबर तक।

बुवाई की विधि:

क्यारी विधि या खालों में बुवाई करें।

दूरी:

पंक्ति: 15–20 सेमी तक।

पौधा: 10 सेमी तक।

गहराई: 3–4 सेमी तक।

कलियों को नुकीला हिस्सा ऊपर रखकर लगाएँ।

सिंचाई प्रबंधन:

बुवाई के बाद हल्की सिंचाई।

हर 10–12 दिन पर सिंचाई करें।

अति-सिंचाई से सड़न और रोग बढ़ते हैं।

तैयार होने के 2 सप्ताह पहले सिंचाई बंद कर दें → गांठ अच्छी पकती है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन:

प्रति हेक्टेयर अनुशंसित मात्रा:

नाइट्रोजन (N): 100 किग्रा

फॉस्फोरस (PO): 50 किग्रा

पोटाश (KO): 50 किग्रा

देने का तरीका:

75% N और पूरा P व K बुवाई के समय दें।

शेष 25% N 45–50 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।

खरपतवार नियंत्रण:

20–25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई।

पेंडीमेथालिन 1 ली/हेक्टेयर (बुवाई के तुरंत बाद) प्रभावी है।

रोग एवं कीट प्रबंधन:

मुख्य रोग

                                                               

झुलसा रोग (Blight)

मैनकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर

डाउनी मिल्ड्यू

मेटालेक्सिल + मैनकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर

सड़न रोग

जलनिकास सही रखें, तांबे के फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

मुख्य कीट

थ्रिप्स (इल्लियां)

इमिडाक्लोप्रिड 100 मि.ली./हेक्टेयर

तना मक्खी

क्लोरपायरीफोस 1.5 लीटर/हेक्टेयर

खुदाई और उपज:

फसल अवधि: 120–150 दिन

पत्ते पीले और सूखने पर खुदाई करें।

उपज:

80–120 क्विंटल/हेक्टेयर (सामान्य)

120–150 क्विंटल/हेक्टेयर (उन्नत प्रबंधन से)

भंडारण:

सिरों को 2–3 दिन धूप में सुखाएँ।

भंडारण स्थान सूखा और हवादार हो।

तापमान: 2–4°C

नमी: 65–70%

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।