
सरसों की खेती से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी Publish Date : 28/11/2025
सरसों की खेती से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रोफेसर आर. एस.सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
आज आपको सरसों की खेती से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियों से परिचित करवाता हूँ। यदि किसान भाई अपनी सरसों की उपज/पैदावार में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो यह सूचना पूरा पढ़ें।
सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर (S) का उपयोग – सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व
सरसों एक sulphur-loving फसल है। सल्फर की कमी से तेल प्रतिशत 4–8% तक कम हो जाता है क्योंकि सल्फर ऑयल संश्लेषण करने वाले एंजाइम (acetyl-CoA carboxylase) को सक्रिय करता है।
सबसे अच्छे तरीके (देश की कई जगहों की मिट्टी में 80% जगहों पर सल्फर की कमी है):
- बुवाई के समय (बेसल डोज): बेंटोनाइट सल्फर 90% @ 40 kg/ha (यानी ≈10 kg प्रति बिघा) या जिप्सम @ 200–250 kg/ha या SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट) में पहले से 12–19% सल्फर होता है। अगर आपने SSP 3–4 कट्टा प्रति बिघा डाला है तो अलग से सल्फर की जरूरत नहीं।
- फलियाँ बनते समय (flowering से pod formation – फरवरी पहला सप्ताह) सल्फर का स्प्रे जरूर करें (यह सबसे ज्यादा असरदार है): घुलनशील सल्फर (जैसे सल्फर 80% WDG या लिक्विड सल्फर) 1.5–2 kg/एकड़ (600–800 ग्राम प्रति बिघा) को 200–300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। या बेंटोनाइट सल्फर का पाउडर (डस्टिंग) 8–10 kg/एकड़ सुबह ओस में करें।
- परिणाम: 2–4% तेल प्रतिशत बढ़ता है + 3–5 क्विंटल/हेक्टेयर उपज बढ़ोतरी (कई किसानों ने 18–22 क्विंटल/हेक्टेयर तक पहुंचाया है)।
2. पहली सिंचाई (फुटाव के समय 25–30 दिन बाद) में ये जरूर डालें –

- प्रति बिघा (0.25 हेक्टेयर ≈ 4 बिघा = 1 हेक्टेयर)
- जिंक सल्फेट (21% या 33%) → 4–5 kg (हेप्टा/मोनो कोई भी चलेगा) → जिंक की कमी से फूल झड़ते हैं, फलियाँ कम बनती हैं, दाने चपटे रहते हैं।
- माइकोराइजा (VAM) → 3 kg (अच्छी क्वालिटी वाली जैसे NFL या IFFCO की) → जड़ें 3–4 गुना मजबूत होती हैं, फॉस्फोरस व जिंक का अवशोषण 30–40% बढ़ता है, पानी की बचत होती है।
- कार्बेंडाजिम 50% WP → 100–120 ग्राम प्रति बिघा यूरिया के साथ घोलकर डालें → यह जड़ गलन (Sclerotinia stem rot), तना गलन व Alternaria blight से बहुत अच्छी रोकथाम करता है।
- ये तीनों यूरिया के साथ पहली पानी में डालने से 3–5 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज बढ़ती है व पौधा मजबूत खड़ा रहता है।
3. अतिरिक्त सबसे जरूरी चीजें जो 90% किसान छोड़ देते हैं (लेकिन ये गेम-चेंजर हैं)
- बोरॉन (Boron): सरसों में बोरॉन की कमी बहुत आम है → फूल झड़ना, फलियाँ खोखली रहना।
- बुवाई के 30–35 दिन बाद बोरॉन 20% (या बोरेक्स 11%) @ 400–500 ग्राम प्रति बिघा 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें।
- परिणाम: फलियाँ 20–30% ज्यादा भरती हैं, तेल प्रतिशत में 1–2% बढ़ोतरी।
- मैग्नीशियम सल्फेट (या EPSO Top) → 1 kg/एकड़ फलियाँ बनते समय स्प्रे करें → पत्तियाँ गाढ़ी हरी रहती हैं, फोटोसिंथेसिस बढ़ता है।
- सल्फर + बोरॉन का कॉम्बो स्प्रे (फरवरी पहला–दूसरा सप्ताह): सल्फर 80% WDG 600 ग्राम + बोरेक्स 400 ग्राम + मैग्नीशियम सल्फेट 400 ग्राम + 5 लीटर यूरिया (200 लीटर पानी में) → यह एक स्प्रे से 3–6 क्विंटल/हेक्टेयर तक फायदा देता है (2024–25 में कई किसानों ने 22–24 क्विंटल/हेक्टेयर लिया इसी से)।
4. राजस्थान के लिए पूरी वैज्ञानिक खाद सिफारिश (SKNAU Jobner & ICAR के आधार पर)
- बुवाई के समय (प्रति हेक्टेयर):
- यूरिया: 100–120 kg (2 बार में – आधा बुवाई पर, आधा पहली सिंचाई)
- DAP: 100 kg या SSP: 300–375 kg
- MOP: 40–50 kg
- सल्फर: 40 kg (अगर SSP नहीं डाला तो)
- जिंक सल्फेट: 25 kg (अगर मिट्टी में कमी हो)
- माइकोराइजा: 10–12 kg/ha बीज उपचार या मिट्टी में।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
