
लहसुन की वैज्ञानिक खेती Publish Date : 21/11/2025
लहसुन की वैज्ञानिक खेती
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
समय: लहसुन की बुवाई का सबसे अच्छा समय अक्टूबर के अंत या नवंबर के शुरुआती सप्ताह में होता है।
लहसुन की खेती के लिए, पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करें, फिर खाद डालें, और बुवाई के बाद सिंचाई करें।
खेत की तैयारी और मिट्टी: जीवांशयुक्त दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो। हल्की बलुई दोमट मिट्टी भी उपयुक्त है।
pH मान:
मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
खेत की जुताई: खेत की 4 से 5 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
बीज की मात्रा: 225-250 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
बीज का उपचार: प्रति किलो बीज को थीरम 2 ग्राम + कार्बेन्डाजिम 50 डब्लयु पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार कर उखेड़ा रोग और कांगियारी से बचाया जा सकता है।
रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विरडी 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करने की सिफारिश की गई है।
इससे नए पौधों को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है।
खाद:
अंतिम जुताई से 3 सप्ताह पहले प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं।
दूरी:
लाइनों के बीच 5 इंच और पौधों के बीच 3 से 4 इंच की दूरी रखें।
बुवाई विधि:
क्यारी विधि, बेड विधि या ब्लॉक विधि का उपयोग कर सकते हैं। बेड विधि से कंद के आकार में मदद मिलती है।
गहराई:
लहसुन की कलियों को 2 इंच से अधिक गहराई में न बोएं।
सिंचाई और पोषण सिंचाई:
- बुवाई के तुरंत बाद पहला पानी दें।
- जब कलियाँ फूटने लगें तो दोबारा पानी दें।
खाद और उर्वरक:
- 50 किलो नाइट्रोजन (110 किलो यूरिया) और 25 किलो फासफोरस (155 किलो एस एस पी) प्रति एकड़ डालें।
- सारी एस एस पी बिजाई से पहले और नाइट्रोजन तीन हिस्सों में बिजाई के 30, 45 और 60 दिन बाद डालें।
- फसल को खेत में लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 और सूक्ष्म तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
- बेसल डोज़ के रूप में, खेत की तैयारी के समय उर्वरक डालें।
- आप कैल्शियम नाइट्रेट और बोरोन का उपयोग कंद के विकास के लिए कर सकते हैं।
- कंद के विकास के लिए NPK 0:52:34 का छिड़काव भी किया जा सकता है।
मुख्य किस्में

भीमा पर्पल: 120-135 दिनों में तैयार होती है, औसतन 24-28 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है।
यमुना सफेद 5: 150-160 दिनों में पकती है, औसतन 68-72 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है।
PG 17: इस पौधे के पत्ते गहरे हरे रंग के और ऊपरली सतह सफेद और आकर्षित होती है। जिस में 25-30 कलियां प्रति गांठ होती हैं। यह किस्म 165-170 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 50 क्विंटल प्रति एकड़ है।
Yamuna Safed (G-1): इसकी गांठे सख्त और सफेद होती हैं और कलियां द्राती के आकार की होती हैं और प्रत्येक गांठ में 25-30 कलियां होती हैं।
Yamuna Safed 2(G-50): इसकी गांठे भी सख्त और सफेद होती हैं और 35-40 कलियां प्रति गांठ होती हैं।
Yamuna Safed 3 (G 282): गांठे सफेद और आकार में बड़ी होती हैं और 15-16 कलियां प्रति गांठ होती हैं।
Yamuna Safed 4 (G 323): गांठे सफेद और 20-25 कलियां प्रति गांठ होती हैं।
शरदकाल में ट्रेंच विधि से बोए गन्ने के साथ सहफसल लगाकर डबल मुनाफा कमाया जा सकता है ।
सहफसल लगाने के लिए फसलों का सुझाव:-
1. सब्जियां जैसे आलू प्याज लहसुन गोभी इत्यादि।
2. दलहन जैसे मूंग चना मसूर आदि।
3. मूंगफली।
ध्यान देने योग्य बातें:-
- सहफसल गन्ने में लाइनों के बीच में ही लगाएं।
- उर्वरक प्रबंधन समय से करें।
यह सूची गेहूं की विभिन्न किस्मों (Varieties) की जानकारी है जो अलग-अलग क्षेत्रों और सिंचाई स्थितियों के अनुसार उपयुक्त हैं। नीचे पूरी किसान सलाह (Detailed Farmer Advisory in Hindi) दी गई है जिससे किसान अपनी मिट्टी, सिंचाई स्थिति और क्षेत्र के अनुसार सही किस्म चुन सकें:
गेहूं की फसल के लिए पूरी सलाह (Detailed Wheat Crop Advisory)।
1. उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए (हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि)।
(A) सिंचित क्षेत्र, अगेती बुवाई (Early Sown)।
अनुशंसित किस्में:
DBW 370, DBW 371, DBW 372, PBW 872, WH 1270, DBW 303, DBW 187, DBW 332, DBW 3271।
सलाह:
बुवाई का समय: 1 नवंबर से 15 नवंबर तक।
बीज दर: 40–45 किलोग्राम प्रति एकड़।
बीज उपचार: कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से करें।
पहली सिंचाई: 20–22 दिन बाद करें।
संतुलित खाद: 50 किलो डीएपी + 25 किलो यूरिया बुवाई के समय।
फसल में रोग: करनाल बंट, पीला रतुआ से बचाव के लिए सिफारिशित किस्में उपयोग करें।
(B) सिंचित क्षेत्र, समय से बुवाई
अनुशंसित किस्में:
PBW 826, HD 3406, DBW 222, HD 3226, PBW 723, HD 30861, WH 1105, PBW 01।
सलाह:
बुवाई समय: 10–25 नवंबर।
उपज: 22–26 क्विंटल/एकड़ तक।
मिट्टी: मध्यम से भारी दोमट सबसे उपयुक्त।
रोग नियंत्रण: फफूंद के लिए ज़रूरत पड़ने पर प्रोपिकोनाजोल का स्प्रे करें।
(C) सीमित सिंचाई (Limited Irrigation)
अनुशंसित किस्में:
HI 1653, HI 1654, HD 296, HI 1620, HI 16201, HD 3170, HD 3043, HD 3237।
सलाह:
केवल 3–4 सिंचाई उपलब्ध क्षेत्रों में उपयुक्त।
बुवाई: 10–20 नवंबर तक करें।
पहली पानी: 20–25 दिन बाद।
उर्वरक प्रबंधन: 1/2 यूरिया बुवाई के समय, बाकी दो सिंचाइयों में।
(D) सिंचित, पछेती बुवाई (Late Sown)
अनुशंसित किस्में:
K 261, PBW 752, DBW 1731
सलाह:
बुवाई: 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक
बीज दर बढ़ाएं (50–55 किग्रा/एकड़)
रोग नियंत्रण और नमी प्रबंधन पर विशेष ध्यान।
2. उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र (पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड)
(A) सिंचित, समय से बुवाई
किस्में: PBW 826, DBW 187, HD 5054, DBW 39, DBW 222, HD 2967, HD 3411, HD 30861
सलाह:
बुवाई समय: 10–25 नवंबर
अच्छी जल निकासी वाली भूमि चुनें।
फफूंद व जंग रोग से बचाव के लिए क्लोरथालोनिल का उपयोग करें।
(B) सिंचित, पछेती बुवाई
किस्में: DBW 316, PBW 833, DBW 107, HD 2985, HD 3118, HD 32711, HD 1621
सलाह:
बुवाई: 25 नवंबर – 10 दिसंबर
बीज दर अधिक रखें।
शुरुआती नमी बनाए रखें।
(C) सीमित सिंचाई
किस्में: HD 3293, DBW 252, HD 16212
सलाह:
3 सिंचाई के लिए उपयुक्त।
बुवाई: 15–25 नवंबर।
(D) वर्षा आधारित (Rainfed Areas)
किस्में: K 1317, HD 31711
सलाह:
वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों के लिए।
बुवाई: अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में करें।
नमी संरक्षण के लिए हल्की जुताई करें।
3. मध्य भारत क्षेत्र (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़)
अनुशंसित किस्में:
DBW 303, DBW 187, HI 1650, MP 6768, JW 513, HI 1636, HI 1544, JW 3661
सलाह:
बुवाई समय: 1–20 नवंबर
अच्छी सिंचाई व्यवस्था और उर्वरक संतुलन आवश्यक।
उर्वरक: 80:40:40 NPK प्रति एकड़।
फसल अवधि: लगभग 110–115 दिन।
सामान्य गेहूं फसल प्रबंधन टिप्स
क्रिया समय / सलाह
बीज उपचार 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 4 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो बीज
पहली सिंचाई बुवाई के 20–22 दिन बाद (क्लो-टिलिंग स्टेज)
दूसरी सिंचाई कल्ले निकलने पर
तीसरी सिंचाई बाल आने से पहले
चौथी सिंचाई दूधिया अवस्था में
अंतिम सिंचाई दाने भरने पर
कटाई बालियाँ पीली होने पर, सुबह जल्दी करें
लाभ:
सही किस्म से उपज 10–20% बढ़ सकती है
रोग प्रतिरोधकता बढ़ती है
पानी और खाद की बचत
अच्छी कीमत (₹2100–₹2500 प्रति क्विंटल तक)
सभी किसान इसे पूरी तरह याद कर लीजिए खेती के पूर्ण ज्ञान के लिए बहुत आवश्यक है।
पौधे को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 40% कार्बन
6% हाइड्रोजन, 44% आक्सीजन की यानि ये 3 तत्व ही 40+06+44=90% आवश्यकता होती है और हम सिर्फ 10% को ही ज्यादा महत्वपूर्ण मानकर सबकुछ गङबङ कर बैठे हैं ।
मिट्टी में कार्बन की मात्रा 2% होनी चाहिए। जो घटकर 0.02 से 0.03 ही रह गई है। इसी असंतुलन की वजह से ज्यादा खाद और दवाओं की खपत बढाने पर किसान मजबूर हो गये हैं।
पौधे के लिए आवश्यक पोषक तत्व व उनके कार्य:- पौधे को 16 तत्वों की आवश्यकता होती है, यह सभी के सभी तत्व वर्मी कंपोस्ट खाद में पाए जाते हैं।
1 मुख्य घटक
कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O)
2 मुख्य पोषक तत्व
1 नाइट्रोजन (N): -
- प्रोमोशनल विकास
- यह एमिनो एसिड, प्रोटीन और एंजाइमों के गठन में मदद करता है।
- क्राइसेंथेमम के उत्पादन के लिए
2 फॉस्फोरस (P): -
- जड़ों, शाखाओं और फूलों के विकास के लिए
- एटीपी के प्रारूप में
- ट्रंक के मजबूत विकास के लिए
- प्रकाश संवेदना में महत्वपूर्ण भूमिका
लहसुन की खेती

बुवाई का सबसे अच्छा समय अक्टूबर के अंत या नवंबर के शुरुआती सप्ताह में होता है।
खेती के लिए, पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करें, फिर खाद डालें, और बुवाई के बाद सिंचाई करें।
खेत की तैयारी और मिट्टी मिट्टी: जीवांशयुक्त दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो। हल्की बलुई दोमट मिट्टी भी उपयुक्त है।
pH मान:
मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
जुताई: खेत की 4 से 5 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
बीज की मात्रा: 225-250 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
बीज का उपचार:- प्रति किलो बीज को थीरम 2 ग्राम+ कार्बेन्डाजिम 50 डब्लयु पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार कर उखेड़ा रोग और कांगियारी से बचाया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
