
सोयाबीन के बेहतर उत्पादन के लिए कुछ आवश्यक उपाय Publish Date : 02/11/2025
सोयाबीन के बेहतर उत्पादन के लिए कुछ आवश्यक उपाय
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
मध्य प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। सोयाबीन के बेहतर उत्पादन के लिए जरुरी उपाय किसानों को बता रहें हैं. सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर-
देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में म.प्र. का योगदान 55 प्रतिशत है और यहाँ सोयाबीन का औसत उत्पादन 10-12 क्विंटल/हेक्टेयर है। यदि सोयाबीन उत्पादन के निर्धारित मापदंडों का प्रयोग किया जाए तो सेायाबीन के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। सोयाबीन के अच्छे उत्पादन के लिए भूमि का चुनाव, अच्छी किस्मों और बीजों का चयन, बुवाई का समय और बीजोपचार ऐसे कार्य हैं, जिन्हें अपनाकर सोयाबीन का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
15-20 दिन की सोयाबीन फसल को पत्ती खाने वाले कीट से बचाव

15-20 दिन की सोयाबीन फसल को पत्ती खाने वाले कीट से फसल का बचाव कैसे करें- भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान ने सोयाबीन की 15-20 दिन अवस्था वाली फसल में पत्ती खाने वाले कीटों के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए सलाह दी हैं। सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाले कीटों से सुरक्षा हेतु फूल आने से पहले ही सोयाबीन फसल में क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मिली/हे) का छिडकाव करें, ऐसा करने आगामी 30 दिनों तक पर्णभक्षी कीटों से फसल को सुरक्षा मिलेगी।
भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने सोयाबीन की फसल की बुआई के 10-12 दिन के बाद की फसल को खरपतवार से बचाने के लिए सोयाबीन कृषकों को अनुशंसित खरपतवार नाशकों के उपयोग की सलाह दी हैं।
फसल की बुवाई करने के 10-12 दिन बाद उपयोगी- क्लोरीम्यूरॉन इथाइल 25 डब्ल्यूपी 36 ग्राम (चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए)।
फसल की बुवाई करने के 15-20 दिन बाद उपयोगी- इमेझेथापायर 10 एस.एल.(1.00 ली.), (चौड़ी पत्ती वाले), इमेझेथापायर 70 प्रतिशत डब्ल्यू. जी + सर्फेक्टेन्ट (100 ग्रा.), (चौड़ी पत्ती एवं घासवर्गीय), क्विजालोफाप इथाईल 5 ई.सी. (0.75-1.00 ली.), क्विजालोफाप-पी-इथाईल 10 ई.सी. (375-450 मि.ली.), फेनाक्सीफाप-पी-इथाईल 9 ई.सी.(1.11 ली.), क्विजालोफाप-पी-टेफ्युरिल 4.41 ई.सी. (0.75- 1.00 ली.), फ्ल्यूआजीफॉप-पी-ब्युटाईल 13.4 ई.सी. (1-2 ली.), हेलाक्सिफॉप आर मिथाईल 10.5 ई.सी. ( 1-1.25 ली.), प्रोपाक्विजाफॉप 10 ई.सी. (0.5-0.75 ली.), (सभी घासवर्गीय) फ्लमूथियासेट मिथाईल 10.3 ई.सी. (125 मि.ली.), (चौड़ी पत्ती वाले) क्लेथोडियम 25 ई.सी. (0.5 -0.70 ली.) (घासवर्गीय) खरपतवारों के लिए उपयोगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
