
किसान गन्ने के साथ मक्का की खेती से बढ़ाएं इनकम Publish Date : 20/10/2025
किसान गन्ने के साथ मक्का की खेती से बढ़ाएं इनकम
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
‘‘ईथेनॉल के उत्पादन के सापेक्ष गन्ना और मक्का की मांग बढ़ी है। मक्का की फसल गन्ने की फसल के मुकाबले कम समय में तैयार हो जाती है। चूँकि गन्ने की वृद्वि धीमी होती है, जिसके साथ 50 प्रतिशत क्षेत्र में मक्का की खेती कर किसान अपनी आय को दुगुनी कर सकते हैं।’’
देश में गन्ने की खेती लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। यूपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु आदि मुख्य देश के गन्ना उत्पादक राज्य हैं। गन्ने की फसल आमतौर पर 10 से 15 महीनों में तैयार होती है और यह फसल किसान को सालभर में एक बार ही मिलती है। इस कारण चीनी मिलें भी साल में 3 से 5 ही चलती हैं, जिसके कारण ईथेनॉल का उत्पादन प्रभावित होता है। भारत सरकार ने पैट्रोल में 20 प्रतिशत ईथेनॉल को मिश्रित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जो कि अब पूर्ण हो चुका है।
इसमें लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी मक्का की है तो लगभग 40 प्रतिशत योगदान गन्ने का है। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआइएमआर) के शोधों में ज्ञात हुआ है कि गन्ने के साथ मक्का की सहफसली खेती करने से हम ईथेनॉल की भट्टियों को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति को सुनिश्चित् कर सकते हैं और इसके साथ ही किसान अपनी आय को भी बढ़ा सकते हैं।
लाभकारी खेती और मुनाफे का मॉडलः

महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश आईसीएआर-आईआईएमआर के वैज्ञानिकों ने गन्ने के इसी धीमें प्रारम्भिक विकास चरण का लाभ उठाने के लिए कम अवधि वाली मक्का की संकर किस्मों का विकास किया है जो कि लगभग 100 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। इस खेती में लगभग समान संसाधनों जैसे कि पानी, उर्वरक, खरपतवारनाशी और कीटनाशकों का उपयोग कर एक साथ ही दो फ।सलों को उगाया जा सकता है।
मक्का की टॉपिंग को हटाने से प्राप्त लाभः
इस प्रक्रिया से खेती करने के दौरान एक विशेष तकनीक को अपनाया जाता है। इस तकनीक में 33-50 प्रतिशत मक्का के घनत्व को बनाकर रखना, यूरिया की अतिरिक्त टॉप ड्रेसिंग और भूरे छिलके वाली अवस्था में मक्का की टॉपिंग हटाने के जैसे तरीके अपानाए जाते हैं।
मक्का में टॉपिंग को हटाने से गन्ने को सूर्य का प्रकाश भरपूर मात्रा में मिलता है। इसके साथ हरा पौष्टिक चारा भी प्राप्त होता है। मक्का के दानों की उच्च गुणवत्ता के लिए उसके भुट्टों को उनके मूल स्थानों पर ही सुखाने की सुविधा भी प्राप्त होती है।
गन्ने के साथ मक्का की खेती एक लाभ वाला सौदा
भारत में लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है। इसके सापेक्ष देश में लगभग 500 चीनी मिलें हैं जो गन्ने के साथ ही मक्का को भी खरीद सकते हैं। गन्ने के साथ 50 प्रतिशत क्षेत्र में मक्का की सहफसली खेती की जा सकती है, जिससे लगभग 15 से 20 क्विंटल तक मक्का की पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पैट्रोल में 20 प्रतिशत ईथेनॉल के मिश्रण के लिए उपयोगी 45 प्रतिशत ईथेनॉल मक्का से बनाया जा रहा है। दोहरे फील्ड वाली डिस्टलरीज को बढ़ावा दिया जाए तो गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति के न होने पर मक्का अथवा अन्य अनाजों से भी ईथेनॉल बनाया जाना सम्भव हो सकेगा।
-डॉ0 एच.एस. जाट, भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान।
प्रति हेक्टेयर तक का एक लाख रूपये का अतिरिक्त लाभः
इस तकनीक को अपनाने से गन्ने के समतुल्य उपज में 28 प्रतिशत तक की वृद्वि हो सकती है। इसके साथ ही 3.5 टन से 5 टन प्रति हेक्टेयर तक मक्का का उत्पादन भी प्राप्त होता है। इस प्रकार प्रति हेक्टेयर शुद्व लाभ 50,000-1,00,000 तक बढ़ सकता है। इसके साथ ही गन्ने के साथ मक्का की खेती करने की लागत अकेले मक्का की खेती करने करने की अपेक्षा लगभग 75 प्रतिशत की कमी भी आ सकती है।
-डॉ0 उमाशंकर मिश्र।
मक्का की फसल एक कम अवधि वाली फसल है, जो कि गन्ने के साथ सहफसली खेती करने के लिए पूर्णतः अनुकल है। इसके साथ ही मृदा की उर्वरता को बढ़ाने, दोहरे फील्ड वाली ईथेनॉल भट्टियों के लिए पूरे वर्षभर फीडस्टॉक की आपूर्ति और किसानों की आय बढ़ाने में गन्ने के साथ मक्का की खेती काफी लाभकारी सिद्व हो सकती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
