गेहूँ की फसल के सम्बन्ध में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी      Publish Date : 13/10/2025

       गेहूँ की फसल के सम्बन्ध में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी

                                                                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

गेहूँ की फसल में लगने वाला रोग पीला रतुआ, जिसके कारण गेहूँ की फसल गिर जाती है, हालांकि यह रोग गेहूँ की समस्त किस्मों में नहीं होता है, बल्कि कुछ किस्में जैसे कि 303, 327, 1270, 3385 और 3386 आदि प्रमुख है।

गेहूँ की फसल में NPK + माइक्रोन्यूट्रीएंट्स का स्प्रे कर गेहूँ की पैदावार को बढ़ाया जा सकता है, हालांकि किस समय पर कौन से पोषक तत्व का स्प्रे करना चाहिए यह जानना भी बहुत जरूरी होता है।

एक स्प्रे में विभिन्न प्रकार के खादों को मिलकर स्प्रे करने का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है बल्कि इसके विपरीत कई बार ऐसा करने से नुकसान भी हो जाता है। इसके लिए किसान भाई यह प्रयास करें कि जिस पोषक तत्व का स्प्रे करना फसल की उस अवस्था विशेष में आवश्यक है केवल उसी का स्प्रे करना लाभकारी रहता है। इस स्पें के के कुछ दिन बाद दूसरी खाद का स्प्रे भी किया जा सकता और इससे फसल को काफी लाभ भी प्राप्त होता है। फसल की स्टेज के अनुसार स्प्रे करने के सम्बन्ध में सुझाव-

फसल की बढ़वार के समयः गेहूँ की बढ़वार के समय नाइट्रोजन, जिंक, सल्फर एवं फॉस्फोरस आदि आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जिका स्प्रे फसल की बढ़वार की स्टेज पर किया जा सकता है।

फूल, फल एवं दाने बनते समयः इस समय फसल पर पोटेशियम और बोरॉन के जैसे पोषक तत्वों का स्प्रे आवश्यक रूप से करना चाहिए।

गेहूँ की उचित बढ़वार एवं पीलापन दूर करने के लिएः एन.पी.के. 19:19:19 अथावा एन.पी.के. 20:20:20 जिंक (EDTA 12%) का स्प्रे किया जा सकता है स्प्रे के लिए 33% और 21% वाला जिंक सल्फेट का प्रयोग न करें।

                                                       

नाइट्रोजन की पूर्ती हेतु गेहूँ में 2 किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे किया जा सकता है।

फॉस्फोरस (DAP) की पूर्ति के लिए NPK 52:34 सबसे अच्छा विकल्प है अथवा एक किलोग्राम DAP का 100 लीटर पानी के सथ मिश्रण बनाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

फल, फूल और दाने बनते समयः NPK 13:00:45 अथवा 00:52:34 के साथ बोरॉन को मिलकार स्प्रे किया जाना उचित रहता है। ऐसा करने से फल, फूल एवं दानों का विकास पूर्ण रूप से होता है जिससे फसल की उपज में वृद्वि होती है।

गेहूँ में जब बालियाँ निकलनी आरम्भ होती है या 10-20 प्रतिशत तक निकल चुकी होती हैं, किसान भाई उस समय भी NPK 00:52:34 अथवा 13:00:45 के साथ बोरॉन को मिलाकर स्प्रे करते हैं तो इसके बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। 

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।