चिया सीड्स की खेती करने की वैज्ञानिक विधि      Publish Date : 22/09/2025

                 चिया सीड्स की खेती करने की वैज्ञानिक विधि

                                                                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

चिया सीड्स की खेती का सबसे अच्छा तरीका और बेहतर कमाई के लिए किसान इसकी खेती करें वैज्ञानिक विधि से-

भारत में किसान अब पारंपरिक फसलों की खेती करने के साथ-साथ ही अपनी कृषिगत आय को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की मुनाफे वाले फसलों की खेती भी बड़ी तादाद में कर रहे है। भारत सरकार भी व्यापारिक फसलों की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित करती रहती है।

इसी के सम्बन्ध में आज हम अपनी इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से एक ऐसी ही एक व्यापारिक फसल चिया सीड्स की खेती की बात करने जा रहें है जिसके अन्तर्गत हमारे कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर बता रहें हैं आपको चिया शीड्स की खेती करने के बारे में।

                                                                  

प्रोफेसर सेंगर कहते हैं कि किसान चिया सीड्स की खेती करके अच्छा लाभ व मुनाफा कमा सकते हैं। चिया सीड्स एक प्रकार का सुपर फूड है। भारत के साथ ही विश्व में सुपर फूड्स (Supper Foods) की मांग और खपत में लगातार वृद्धि हो रही है, साथ ही विदेशी बाजारों में भी चिया सीड्स की मांग तेजी से बढ़ रही हैं। आरम्भ में चिया सीड्स की खेती केवल अमेरिका में ही की जाती थी, लेकिन सेहत और खेती के नजरिये से इसके लाभ को समझते हुए अब भारत के कई क्षेत्रों में भी चिया सीड्स की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है।

चिया सीड्स के औषधीय गुण

चिया के बीजों में विभिन्न प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं। चिया सीड्स में ओमेगा फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त चिया सीड्स में फाइबर, कैल्शियम, प्रोटीन और अनेक मिनरल्स जैसे पोषक तत्व भी उपलब्ध होते है। इसके चलते चिया सीड्स का सेवन शरीर व दिल को बीमारियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करता है। चिया सीड्स स्वास्थ के लिए अत्याधिक लाभकारी होते है, विदेशों में इसे सुपर फ़ूड की संज्ञा भी मिली हुई है।

चिया सीड्स की खेती करने के लिए उपयुक्त तापमान और मिट्टीः

चिया सीड्स की खेती करने के लिए सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है, हालांकि अधिक ठंडी जलवायु वाले पहाड़ी क्षेत्रों में चिया की खेती नहीं की जा सकती। अतः पहाड़ी क्षेत्रों के अतिरिक्त देश के सभी क्षेत्रों में चिया की खेती की जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार चिया सीड्स की खेती किसी भी प्रकार की भूमि में आसानी से की जा सकती है, लेकिन हल्की भुरभुरी और उचित जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी को इसके अधिक उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

चिया के बीजों की बुवाई करने की विधिः

आमतौर पर चिया सीड्स के बीज की बुवाई खेत में करने के लिए छिड़काव विधि का प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसकी बुवाई लाइनों में करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। यदि खेत में इसकी बुवाई के समय नमी की मात्रा कम है, तो पहले एक हल्की सिंचाई करके खेत को बुवाई के लिए तैयार कर लिया जाता है। इसकी बीजों की बुवाई 30 सेंटीमीटर की दूरी पर 1.5 सेमी की गहराई पर की जानी चाहिए, इससे इसके बीज के अंकुरण होने में आसानी होती है। चिया सीड्स के एक एकड़ के खेत में लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम चिया के बीजों को खपत हो जाती है।

                                                              

बीज की बुवाई करने से पहले केप्टान या थीरम फफूंदनाशक की 2.5 ग्राम की मात्रा से एक किलोग्राम बीज को उपचारित किया जाता है, ताकि बीजों को जड़ गलन जैसे रोगों से बचाया जा सकें। चिया के बीजों की रोपाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

चिया सीड्स की खेती के करने के लिए खेत की तैयारीः

चिया के बीजों के अधिक उत्पादन के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करना उपयुक्त रहता है। इसके लिए खेत की सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल या कल्टीवेटर की मदद से 2 से 3 बार गहरी जुताई करने के बाद खेत में रोटोवेटर से 1 से 2 बार जुताई करके खेत की मिट्टी भुरभुरा बना लेना चाहिए, इसके बाद खेत में पाटा लगाकर खेत को समतल करना उचित रहता है। चिा के बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए बुवाई से पहले खेत में नमी के उचित स्तर की आवश्यकता होती है, जिसके लिए खेत की पहले पलेवा करके बुवाई करना सबसे उचित तरीका होता है।

चिया सीड्स की खेती में खाद व उवर्रक प्रबंधनः

चिया की खेती करने के लिए खेत की मिट्टी का परीक्षण करके उसमें खाद व उवर्रक को उचित मात्रा में देना आवश्यक होता है। चिया सीड का अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति एकड़ के खेत में 10 टन सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट खाद को खेत की जुताई करते समय ही मिला देते हैं। इसके अलावा प्रति एकड़ के खेत में 40:20:15 के अनुपात में सामान्य उवर्रक वाली N.P.K. की मात्रा का छिड़काव करना उचित रहता है। इसके बाद बुवाई के 30 से 60 दिन बाद नाइट्रोजन की दो बराबर मात्रा का छिड़काव सिंचाई करने के बाद इसकी खड़ी फसल पर करना फसल के लिए उचित रहता है। चिया सीड्स की ऑर्गेनिक खेती के लिए नीम का तेल और नीम की खली की खाद सबसे उत्तम माना जाता है।

चिया सीड्स की खेती में सिंचाई प्रबंधन

हालांकि चिया की खेती करते समय इसके पौधों को विशेष सिंचाई की विशेष आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि इसका पौधा अधिक कमजोर होता है, और अधिक पानी के कारण पौधों के टूटने का खतरा अधिक होता है। इसलिए इसकी फसल में जल भराव बिल्कुल भी नही होने देना चाहिए तथा पहले से ही उचित जल निकासी वाली भूमि का चयन चिया की बुवाई लिए करना उचित रहता है।

चिया सीड्स की फसल में लगने वाले रोग

चिया की फसल में कटवा इल्ली रोग अधिक देखने को मिलता है। यह रोग पौधों को मिट्टी की सतह के पास से काटकर फसल को हानि पहुंचाता है तथा पत्तियों में भी खुजलीपन होने लगता है। इस रोग की रोकथाम करने के लिए प्रति लीटर पानी में क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी दवा की 2.5 एमएल की मात्रा को मिलाकर उसका छिड़काव पौधों पर करना चाहिए।

चिया सीड्स के खेती में खरपतवार नियंत्रणः

चिया सीड्स की फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए फसल को खरपतवार से मुक्त रखना बहुत आवश्यक होता है। इसके लिए खेत में बीज की बुवाई करने के 30 से 40 दिन बाद फसल की गुड़ाई की जाती है तथा 30 दिन के अंतर में और दो गुड़ाइयों को करना जरूरी होता है। इस फसल में निराई-गुड़ाई करते समय अनावयश्यक पौधों को खेत से निकाल कर बाहर कर दिया जाता है।

चिया सीड्स फसल की कटाई, पैदावार और लाभः

                                                               

चिया सीड्स के पौधे की बुवाई करने के 110  से 115 दिन बाद पककर कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। कटाई के दौरान इसके पौधों को पूरी तरह से उखाड़ लिया जाता है तथा 5 से 6 दिन तक पौधों को ठीक से धूप में अच्छी तरह से सूखा लिया जाता है। अब इन सूखे हुए पौधों से थ्रेशर मशीन के द्वारा इसके बीजों को निकाल कर अलग कर लिया जाता है। इसकी एक एकड़ के खेत से लगभग 5 से 6 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

चिया के बीजों की बाज़ार में कीमत लगभग 1 हज़ार रुपए प्रति किलोग्राम तक प्राप्त हो जाती है, जिससे किसान भाई इसकी एक एकड़ की फसल से 5 से 6 लाख रुपए तक का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।