
धान और मक्का की बढ़ी खेती से खरीफ बुवाई 3.7\% और तिलहन और कपास में कमी Publish Date : 23/08/2025
धान और मक्का की बढ़ी खेती से खरीफ बुवाई 3.7% और तिलहन और कपास कमी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
दालों में उड़द और मूंग की बुवाई बढ़ी है। उड़द की बुवाई 4.6% बढ़कर 20.82 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई 2.9% बढ़कर 33.70 लाख हेक्टेयर हो गई। हालांकि, अरहर (तुअर) की खेती 3.1% घटकर 42.20 लाख हेक्टेयर रह गई। कुल मिलाकर दालों की बुवाई 1% बढ़ी है।
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि कुल रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7% बढ़ा है। इस सीजन में 15 अगस्त तक 1039.81 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी थी, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 1002.41 लाख हेक्टेयर था।
धान और मक्का ने बढ़ाया कुल रकबा

धान और मक्का की खेती ने इस साल कुल बुवाई में बढ़ोतरी की है। धान का रकबा 9.8% बढ़कर 398.59 लाख हेक्टेयर हो गया। मक्का में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है 11.8% की बढ़ोतरी के साथ इसका रकबा 92.79 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। मोटे अनाज (जैसे ज्वार, बाजरा) की कुल खेती भी 5.3% बढ़कर 182.34 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई।
दालों की स्थिति
दालों में उड़द और मूंग की बुवाई बढ़ी है। उड़द की बुवाई 4.6% बढ़कर 20.82 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई 2.9% बढ़कर 33.70 लाख हेक्टेयर हो गई। हालांकि, अरहर (तुअर) की खेती 3.1% घटकर 42.20 लाख हेक्टेयर रह गई। कुल मिलाकर दालों की बुवाई 1% बढ़ी है।
तिलहन और कपास में गिरावट
तिलहन की खेती में इस बार कमी आई है। कुल तेलहन रकबा 3.6% घटकर 178.64 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें सोयाबीन की खेती 3.8% घटकर 119.82 लाख हेक्टेयर और मूंगफली 4.5% घटकर 43.98 लाख हेक्टेयर रह गई। कपास की बुवाई भी 2.9% घटकर 107.87 लाख हेक्टेयर हो गई है।
बारिश और मौसम का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल अब तक अच्छी दिख रही है, लेकिन अगले 40 दिन बहुत अहम होंगे। उर्वरक की खपत 13% बढ़ी है, जिससे अच्छे उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इस बार बारिश का वितरण बहुत असमान रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से 80% कम बारिश हुई है, जबकि कई जगहों पर 100% से ज्यादा बारिश हुई। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 88% कम बारिश हुई, जबकि एटा जिले में सामान्य से 86% ज्यादा। राजस्थान ने इस बार सबसे ज्यादा 39 फीसदी मानसूनी बारिश अधिक देखी है। लेकिन वहां अधिक बारिश और जलभराव से मूंग, बाजरा, उड़द, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें कुछ इलाकों में खराब भी हो गई हैं।
किसानों की चिंता
किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जिन किसानों की फसलें जलभराव या अधिक बारिश से बर्बाद हो गई हैं, उनके बैंक खाते से बीमा प्रीमियम कटौती रोकी जाए। उनका कहना है कि इन किसानों को सीधा मुआवजा दिया जाए और बीमा प्रीमियम सरकार खुद भरे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
