
नींबू की फसल में बैक्टीरियल कैंकर रोग का प्रकोप, उसका समाधान Publish Date : 05/08/2025
नींबू की फसल में बैक्टीरियल कैंकर रोग का प्रकोप, उसका समाधान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं रेशु चौधरी
अगर आपकी नींबू की फसल में उसके फलों या टहनियों पर भूरे रंग के जालीनुमा धब्बे नजर आ रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए। यह बैक्टीरियल कैंकर रोग का प्रकोप है। यह रोग नींबू की फसल को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और समय पर उपचार न करने पर पैदावार में भारी गिरावट भी आ सकती है।
यदि किसान समय रहते सही कदम उठाएं, तो न केवल नींबू की फसल को बचाया जा सकता है, बल्कि उसके उत्पादन और गुणवत्ता को भी बनाए रखा जा सकता है। अतः किसान भाईयों से अपील है कि वह इस रोग के प्रति सुरक्षा उपायों का पालन आवश्यक रूप से करें।
क्या है बैक्टीरियल कैंकर?

बैक्टीरियल कैंकर नींबू के पौधों का एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से नींबू के फलों, टहनियों और पत्तियों पर भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देता है। इस रोग के प्रकोप से नींबू के पौधे की वृद्धि रूक जाती है और फल समय से पहले झड़ने लगते हैं। यह रोग वर्षा ऋतु के दौरान और अधिक तीव्र हो जाता है।
रोग नियंत्रण के उपाय
सबसे पहले रोग से प्रभावित टहनियों को पहचानकर उन्हें काटकर रोग ग्रस्त फलों, टहनियों और पत्तियों को खेत से पूरी तरह हटा दें, ताकि संक्रमण का फैलाव रोका जा सके।
रोग को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए कॉपर सल्फेट 5 किलोग्राम और चूना 5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में घोलकर तैयार किया गया बोर्डाे मिश्रण का पौधों पर छिड़काव करें। यह फफूंदनाशी और रोगनाशी मिश्रण पौधों की सतह पर सुरक्षात्मक परत बनाता है और बैक्टीरिया को फैलने से रोकता है।
किसानों के लिए सुझाव
नींबू उगाने वाले किसानों को सलाह है कि वह वर्ष में कम से कम दो बार पौधों की निगरानी अवश्य करें- एक बार मानसून के पहले और एक बार मानसून के बाद। रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार करें और टहनियों की समय-समय पर छंटाई करते रहें। यदि किसान समय रहते सही कदम उठाएं, तो इससे न केवल फसल को बचाया जा सकता है, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता को भी बनाए रखा जा सकता है। अतः किसान भाईयों से अपील है कि वह नींबू की फसल में सुरक्षा उपायों का पालन आवश्यक रूप से करते रहें और नींबू की उत्पादकता एवं उसकी गुणवत्ता को बनाए रखें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
